देशभर में ‘मैं मुहम्मद से मोहब्बत करता हूँ’ प्रदर्शन पर APCR रिपोर्ट: 4,500 लोगों पर केस, बरेली में सामूहिक दंड और तोड़फोड़ का आरोप

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) ने अपनी फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट “A Fact-Finding Report into Collective Punishment and Criminalizing Faith: ‘I Love Muhammad’ Demonstrations in Bareilly” जारी की है। रिपोर्ट में 26 सितंबर 2025 को बरेली में हुए प्रदर्शन और उसके बाद देशभर में हुई पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई को “सामूहिक दंड और धार्मिक आस्था को अपराध की तरह देखने” का उदाहरण बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रदर्शन कानपुर में दर्ज विवादित एफआईआर के विरोध में हुआ। ईद-मिलाद-उन-नबी के दौरान लगाए गए “I Love Muhammad” बैनर को लेकर पुलिस ने आयोजकों पर साम्प्रदायिक तनाव फैलाने का आरोप लगाया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह बैनर प्रशासनिक अनुमति से लगाया गया था, लेकिन दक्षिणपंथी संगठनों के विरोध के बाद पुलिस ने उल्टा मुस्लिम आयोजकों पर ही कार्रवाई की।

देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद करीब 4,500 लोगों पर मुकदमे दर्ज किए गए। बरेली में बरेलवी धर्मगुरु और इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख मौलाना तौकीर रज़ा खान के नेतृत्व में हजारों लोग जुमे की नमाज़ के बाद शांतिपूर्वक प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रशासन ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी, लेकिन भीड़ शांतिपूर्ण थी।

APCR रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने बिना चेतावनी के लाठीचार्ज और बल प्रयोग किया। स्थानीय वकील ने कहा, “वीडियो में साफ़ दिखता है कि भीड़ शांत थी, लेकिन पुलिस ने अचानक हमला कर दिया।”

रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के 48 घंटे के भीतर 10 एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें 2,000 से अधिक लोगों को नामजद किया गया। 7 अक्टूबर तक 89 मुस्लिमों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें कई नाबालिग भी शामिल थे। कई लोगों को बिना कारण बताए हिरासत में लिया गया और एफआईआर की कॉपी तक नहीं दी गई।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्रदर्शन के बाद संपत्तियों पर कार्रवाई की गई। पहलवान मार्कज़ मार्केट की 32 दुकानों को बिना नोटिस सील किया गया और मौलाना तौकीर रज़ा के करीबी डॉ. नफीस के रज़ा पैलेस बैंक्वेट हॉल को ढहा दिया गया। स्थानीय लोगों ने इसे “प्रदर्शन की सज़ा” बताया।

APCR ने निष्कर्ष निकाला कि प्रशासन ने “आक्रामक और असंतुलित” तरीके से कार्रवाई की, जिससे नागरिक अधिकारों, विधिक प्रक्रिया और मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ। रिपोर्ट में कहा गया कि मुस्लिम बहुल इलाकों में भारी पुलिस तैनाती रही, जबकि हिंदू बहुल इलाके अप्रभावित रहे।

संगठन ने सरकार से संवाद बहाल करने, पुलिस की ज्यादतियों की जांच करने, ग़ैरक़ानूनी रूप से गिरफ्तार लोगों को रिहा करने, और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की। रिपोर्ट में कहा गया है “सरकार को आस्था के शांतिपूर्ण इज़हार को विद्रोह के रूप में देखना बंद करना चाहिए। इबादत और मोहब्बत के भाव को अपराध नहीं बनाया जा सकता।”

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