गुवाहाटी हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत असम के Dhing विधायक अमीनुल इस्लाम की हिरासत को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि उन पर कोई अन्य मामला दर्ज नहीं है तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। विधायक को छह महीने पहले उनके उस बयान के कारण गिरफ्तार किया गया था, जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम और पुलवामा हमलों को केंद्र सरकार की “साज़िश” बताया था।
न्यायमूर्ति कल्याण राय सुराना और न्यायमूर्ति राजेश मजूमदार की बेंच ने कहा कि इस्लाम की NSA हिरासत अमान्य है। कोर्ट ने बताया कि अधिकारियों ने उनके प्रतिनिधित्व (representation) पर अनावश्यक देरी की और उन्हें संघीय सरकार के पास अपील के अधिकार की जानकारी बहुत देर से दी गई।
इस्लाम के वकील संतानु बोरठाकुर ने बताया कि विधायक को शुक्रवार को रिहा किए जाने की उम्मीद है।
विधायक अमीनुल इस्लाम को 24 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने राजनीतिक रैली में दावा किया था कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले की साज़िश केंद्र सरकार की है। इस्लाम को पहले जमानत मिल चुकी थी, लेकिन NSA के तहत उन्हें उसी दिन हिरासत में लिया गया।
उन्हें BNS सेक्शन 152 सहित अन्य मामलों में गिरफ्तार किया गया था, जो भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा करने वाले कृत्यों के तहत आता है। NSA हिरासत का आदेश नागांव के डिप्टी कमिश्नर ने दिया था, जिन्होंने कहा कि विधायक “सार्वजनिक व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों में लिप्त हैं।”
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतिनिधित्व पर देरी और अपील के अधिकार की जानकारी में विलंब संविधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने फैसला दिया कि यह हिरासत वैध नहीं है और विधायक को रिहा किया जाए।
AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि इस्लाम की NSA हिरासत राजनीतिक रूप से प्रेरित थी। उन्होंने कहा “उन्होंने ऐसा कोई अपराध नहीं किया जो NSA के तहत आए। उन्हें जमानत मिली, लेकिन फिर NSA के तहत हिरासत में लिया गया, यह एक साज़िश है।”
