इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
बिहार में सामंती ताकतों की बेलगाम हिंसा ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। औरंगाबाद में 13 साल की कोमल पासवान की निर्मम हत्या और नौबतपुर में ऑटो चालक ललन यादव की गोली मारकर हत्या ने सत्ताधारी एनडीए सरकार की नाकामी को उजागर किया है। भाकपा (माले) ने दोनों घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग उठाई है।
औरंगाबाद में कोमल पासवान हत्याकांड: एक आरोपी गिरफ्तार, मुख्य अभियुक्त फरार
औरंगाबाद के पासवान टोली मोहल्ले में 14 मार्च 2025 को होलिका दहन के दिन हुई कोमल कुमारी (13) की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। लोजपा (रामविलास) के पूर्व जिलाध्यक्ष और रफीगंज से संभावित विधानसभा उम्मीदवार मनोज सिंह, उनके बेटे रंजय कुमार उर्फ सन्नी सिंह और भाई बिनोद सिंह ने कोमल और उसकी बहन स्वीटी कुमारी (22) पर अपनी कार चढ़ा दी। घटना में कोमल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि स्वीटी और दो अन्य लड़कियां घायल हो गईं। आरोपियों ने पहले जातिसूचक गालियां दीं और फिर सुनियोजित तरीके से हमला किया।
भाकपा (माले) की जांच टीम, जिसमें विधान पार्षद शशि यादव, घोषी विधायक रामबली सिंह यादव, गया जिला सचिव निरंजन कुमार और अन्य नेता शामिल थे, ने 19 मार्च को घटनास्थल का दौरा किया। टीम ने इसे सामंती मानसिकता और सत्ता के दुरुपयोग का नतीजा करार दिया। माले की पहलकदमी के बाद सन्नी सिंह को गिरफ्तार किया गया, लेकिन मुख्य आरोपी मनोज सिंह अभी भी फरार है। शशि यादव ने कहा, “एनडीए सरकार अपराधियों को संरक्षण दे रही है। यह घटना साबित करती है कि भाजपा और उनके सहयोगी दलितों और महिलाओं के खिलाफ हैं।”
नौबतपुर में ललन यादव की हत्या: प्रशासन की मौजूदगी में वारदात
दूसरी ओर, पटना जिले के नौबतपुर इलाके में छोटी टंगरैला गांव में 13 मार्च 2025 को होलिका दहन के दिन सवर्ण सामंती ताकतों ने वर्चस्व की लड़ाई में ऑटो चालक ललन यादव, प्रेम कुमार यादव और प्रेमजीत यादव पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं। इस हमले में ललन यादव की मौके पर मौत हो गई, जबकि प्रेम कुमार और प्रेमजीत गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को पटना एम्स में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद वे 19 मार्च को घर लौटे। हैरानी की बात यह है कि यह घटना प्रशासन की मौजूदगी में हुई, लेकिन अब तक अपराधी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
भाकपा (माले) की पांच सदस्यीय जांच टीम, जिसमें फुलवारी विधायक गोपाल रविदास और पालीगंज विधायक संदीप सौरभ शामिल थे, ने 19 मार्च को गांव का दौरा किया। पीड़ित परिवारों ने जांच दल के सामने न्याय की गुहार लगाई। गोपाल रविदास ने कहा, “बिहार में डबल इंजन की सरकार सामंती ताकतों पर लगाम लगाने में नाकाम रही है। यह घटना प्रशासन की लापरवाही का जीता-जागता सबूत है।”
माले की मांगें और आगे की रणनीति
दोनों घटनाओं की जांच के बाद माले ने सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की है। औरंगाबाद मामले में पार्टी ने मुख्य आरोपी मनोज सिंह की तत्काल गिरफ्तारी और कोमल के परिवार को न्याय की मांग की है। वहीं, नौबतपुर मामले में जांच दल ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
1.मृतक ललन यादव के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा।
2.ललन के बच्चों की शिक्षा और भरण-पोषण की जिम्मेदारी सरकार द्वारा।
3.घायलों को उचित मुआवजा और इलाज की गारंटी।
4.अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी।
माले ने 20 मार्च 2025 को पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की घोषणा की है, जिसमें पार्टी इन मुद्दों पर अपना विस्तृत रुख स्पष्ट करेगी। संदीप सौरभ ने कहा, “नौबतपुर, औरंगाबाद, संपतचक और दुल्हिन बाजार जैसी घटनाएं बिहार में सामंती आतंक का प्रमाण हैं। हम इस अन्याय के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।”
बिहार में कानून-व्यवस्था पर सवाल
इन घटनाओं ने बिहार में बढ़ते सामंती हिंसा और सरकार की निष्क्रियता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। माले नेताओं का आरोप है कि भाजपा और एनडीए के संरक्षण में सामंती ताकतें बेखौफ होकर दलितों, पिछड़ों और महिलाओं पर हमले कर रही हैं। दोनों इलाकों में भय और तनाव का माहौल है, और लोग प्रशासन से सुरक्षा की उम्मीद खोते जा रहे हैं।
माले ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो पार्टी सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन तेज करेगी। इन घटनाओं पर जनता की नजरें टिकी हैं, और यह देखना बाकी है कि सरकार इस चुनौती से कैसे निपटती है।
