इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
महाराष्ट्र के एक गाँव में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने समाज और प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। पुलिस ने एक पिता को उसकी ही तीन नाबालिग बेटियों के साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने एक बेटी का चार बार जबरन गर्भपात भी कराया। यह मामला पिछले कई सालों से चल रहे अत्याचारों का है, जो अब जाकर उजागर हुआ है।
मामले का खुलासा कैसे हुआ?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना का खुलासा तब हुआ जब सबसे बड़ी बेटी ने स्थानीय एनजीओ और महिला हेल्पलाइन के सामने शिकायत दर्ज की। पीड़िता ने बताया कि उसके पिता ने पिछले पाँच सालों से उसे और उसकी दो छोटी बहनों को शारीरिक व मानसिक प्रताड़ित करते हुए बलात्कार किया। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि जब बड़ी बेटी गर्भवती हुई, तो आरोपी ने उसका चार बार असुरक्षित गर्भपात करवाया।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
शिकायत मिलते ही पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज करते हुए पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(बलात्कार),313 (गर्भपात के लिए मजबूर करना), और 507 (धमकी) के तहत मामला दर्ज किया। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अधीक्षक ने बताया, “पीड़िताओं के बयान दर्ज किए गए हैं और मेडिकल जाँच की रिपोर्ट का इंतजार है। पीड़िताओं को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है।”
परिवार और समाज की प्रतिक्रिया
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िताओं की माँ घरेलू हिंसा और आर्थिक डर के कारण चुप रही। हालाँकि, बेटियों के साहस के बाद उसने भी पुलिस को सहयोग दिया है। गाँव के लोग हैरान हैं और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। स्थानीय महिला आयोग ने भी मामले में हस्तक्षेप करते हुए त्वरित न्याय की अपील की है।
महाराष्ट्र में यौन हिंसा के मामले
यह मामला महाराष्ट्र में बढ़ते पारिवारिक यौन हिंसा के चलन को फिर उजागर करता है। २०२२ के एनसीआरबी डेटा के अनुसार, राज्य में पॉक्सो के तहत २,३०० से अधिक मामले दर्ज हुए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक कलंक और पुलिसिया देरी ऐसे मामलों को छिपाने का कारण बनती है।
पुलिस अब आरोपी के खिलाफ सबूत जुटा रही है। पीड़िताओं का काउंसलिंग की जा रही है, और केस की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी। बाल अधिकार कार्यकर्ता डॉ. मीनाक्षी शर्मा कहती हैं, “ऐसे मामले समाज की विफलता हैं। हमें बच्चों के प्रति संवेदनशीलता और कानूनों को सख्ती से लागू करने की जरूरत है।”
यह घटना न सिर्फ पारिवारिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि समाज और कानून को नाबालिगों की सुरक्षा के लिए और सजग होना होगा।