इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतनराम मांझी ने पार्टी के लिए 15 से 20 सीटों की मांग की है। वहीं उनके बेटे और HAM के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने पिता के बयान से अलग रुख अपनाते हुए एनडीए के साथ बने रहने की बात कही है।
जीतनराम मांझी ने रविवार को कहा कि अगर उनकी पार्टी को एनडीए में 15 से 20 सीटें नहीं मिलती हैं तो वे स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का विकल्प भी अपनाने को तैयार हैं। उनका कहना है कि पार्टी को राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त दल बनने के लिए कम से कम सात सीट जीतनी जरूरी हैं। इसके लिए अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना आवश्यक है।
HAM के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन ने कहा कि वे एनडीए की विचारधारा के साथ मजबूती से खड़े हैं और किसी अन्य विकल्प पर विचार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पार्टी को ज्यादा सीटों की जरूरत है, लेकिन इस मांग को वे मीडिया में नहीं बल्कि एनडीए की बैठक में उठाएंगे।
लोक जनशक्ति पार्टी-राम विलास (LJP-RV) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे सीटों और चुनावी मुद्दों को लेकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। वहीं HAM के भीतर सीटों को लेकर मतभेद और पिता-पुत्र के अलग-अलग बयानों ने एनडीए में खींचतान बढ़ा दी है।
HAM पार्टी का लक्ष्य राज्य स्तर की मान्यता प्राप्त करना है। इसके लिए पार्टी को 243 विधानसभा सीटों में कम से कम सात पर जीत और कुल वोट का 6 प्रतिशत हासिल करना आवश्यक है। यही वजह है कि HAM 15 से 20 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है।
संतोष सुमन ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता एनडीए के साथ चुनाव लड़ना है। उन्होंने कहा कि सीटें कितनी मिलेंगी और कौन-कौन चुनाव लड़ेगा, इसका फैसला गठबंधन की बैठक के बाद ही होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को भी चुनावी मैदान में उतारा जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पिता-पुत्र के अलग-अलग बयान एनडीए में सीटों की अपनी मांग को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में HAM ने एनडीए के टिकट पर सात सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से चार पर जीत हासिल हुई थी।
आगामी दिनों में एनडीए में सीट शेयरिंग पर क्या निर्णय होता है और HAM की चुनावी रणनीति किस दिशा में जाती है, यह बिहार की राजनीतिक हलचल के लिए अहम रहेगा।
