बिहार में एग्री स्टैक योजना के तहत चल रहे फार्मर रजिस्ट्रेशन अभियान ने नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। रविवार को एक ही दिन में 2.87 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण किया गया, जो अभियान के तय दैनिक लक्ष्य 2.48 लाख से कहीं अधिक है। यह लगभग 116 प्रतिशत की उपलब्धि को दर्शाता है और राज्य में किसानों के डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक कुल 16.12 लाख से अधिक किसानों का सफल पंजीकरण हो चुका है। साथ ही, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पंजीकृत किसानों की संख्या 10.48 लाख से ऊपर पहुंच गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक सक्रियता और तकनीकी व्यवस्था के कारण यह अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है।
बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा “फार्मर रजिस्ट्रेशन अभियान राज्य के किसानों को डिजिटल पहचान देने की ऐतिहासिक पहल है। इससे पीएम किसान सहित केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों के खाते में पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचेगा।”
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में पीएम किसान योजना का कुल लक्ष्य 75.01 लाख किसानों को जोड़ना है, जिसमें अब भी लगभग 64.53 लाख किसानों का सत्यापन और कवरेज शेष है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सभी जिला प्रशासन को मिशन मोड में अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
रविवार को अभियान को गति देने के लिए पंचायत स्तर पर विशेष शिविर भी आयोजित किए गए। इसी वजह से बड़ी संख्या में किसानों ने मौके पर ही अपना फार्मर रजिस्ट्रेशन कराया।
कई बड़े जिलों ने इस अभियान में शानदार प्रदर्शन किया है। मुजफ्फरपुर में 95,351, कटिहार में 69,722, पूर्णिया में 66,765, भागलपुर में 67,385, मधुबनी में 46,926 और रोहतास में 46,366 किसानों का पंजीकरण पूरा हुआ। इन जिलों में दैनिक लक्ष्य के मुकाबले 150 से 190 प्रतिशत तक की उपलब्धि दर्ज की गई।
छोटे जिलों में भी अभियान की गति संतोषजनक रही। शिवहर में 17,715, शेखपुरा में 19,114, अरवल में 10,407 और लखीसराय में 14,535 किसानों ने फार्मर रजिस्ट्रेशन कराया। अधिकारियों का कहना है कि यह स्थानीय प्रशासन और पंचायत स्तर की सक्रियता को दर्शाता है।
प्रधान सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, सीके अनिल ने कहा “फार्मर रजिस्ट्रेशन अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को डिजिटल पहचान प्रदान करना है। इससे न केवल पीएम किसान, बल्कि भविष्य में आने वाली सभी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचेगा। सभी मुखिया, सरपंच और पंचायत प्रतिनिधियों से अपील है कि वे किसानों को सही जानकारी दें और उन्हें पंजीकरण के लिए प्रेरित करें।”
राज्य सरकार का फोकस अब शेष किसानों के पंजीकरण, सत्यापन और लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन पर है, ताकि तय समयसीमा में अभियान अपने लक्ष्य को पूरा कर सके।
