बिहार सरकार ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब राज्य स्तरीय शिक्षक पात्रता परीक्षा BTET आयोजित नहीं की जाएगी। अब प्राथमिक (कक्षा 1‑5) और मध्य (कक्षा 6‑8) स्तर के शिक्षकों के लिए केवल केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा CTET को मान्य किया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने बताया कि दो अलग-अलग पात्रता परीक्षाओं के कारण अभ्यर्थियों को भ्रम और अतिरिक्त बोझ का सामना करना पड़ता था। कई बार उम्मीदवारों को राज्य और केंद्र, दोनों परीक्षाएं देनी पड़ती थीं। इसी समस्या को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि यह नियम केवल नई भर्तियों पर लागू होगा।
CTET ही अब मुख्य पात्रता, अब BTET परीक्षा पूरी तरह बंद हो गई है, कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षण पदों के लिए केवल CTET पास उम्मीदवार ही पात्र माने जाएंगे, आगामी BPSC TRE‑4 भर्तियों और अन्य राज्य भर्ती प्रक्रियाओं में CTET प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा।
शिक्षा विभाग का तर्क है कि इससे देशभर में शिक्षकों की योग्यता तुलनीय होगी और चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। विभाग का मानना है कि इससे भविष्य में अंतरराज्यीय अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।
शिक्षाविद् गुरु रहमान ने मीडिया से कहा कि इस बदलाव से अभ्यर्थियों के माइंडसेट में स्पष्टता आएगी। अब उम्मीदवार केवल CTET की तैयारी करेंगे और BTET को लेकर कोई भ्रम नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि CTET राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है और इसके माध्यम से अभ्यर्थी पूरे देश में शिक्षक बनने की योग्यता हासिल कर सकते हैं।
गुरु रहमान ने आगे कहा “CTET का पाठ्यक्रम और प्रश्नों का स्तर व्यापक है। बिहार के अभ्यर्थियों के लिए यह प्रतियोगिता राष्ट्रीय स्तर पर अवसरों के द्वार खोलेगी। इससे चयन प्रक्रिया पारदर्शी होगी और शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार आएगा।”