इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
अमरोहा जिले के दो अलग-अलग गांवों में दलित युवकों पर कथित जातिवादी हमले ने स्थानीय समाज में आक्रोश फैला दिया है। इन घटनाओं में पुलिस की धीमी कार्रवाई और आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम न उठाने को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
8 सितंबर को भंवली गांव में 26 वर्षीय दलित युवक काशेंद्र, जो सेल्समैन हैं, को तीन सवर्ण युवकों ने जातिवादी गालियों के साथ पीटा। घटना के समय काशेंद्र ने आरोपियों की बदसलूकी का विरोध किया, जो बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ वहां मौजूद थे। आरोपियों ने काशेंद्र को ‘चमार’ जैसे अपशब्द कहे और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। काशेंद्र ने रेहरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस अब तक किसी ठोस कार्रवाई के लिए गंभीर नहीं हुई है और आरोपी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं।
17 अगस्त को मुसल्लेपुर गांव में शिवम सिंह नामक दलित युवक ने शराब पीने से मना किया, जिसके बाद चार सवर्ण युवकों ने उस पर हमला कर दिया। आरोप है कि उन्होंने धारदार हथियार से शिवम की नसें काट दीं, जिससे एक हाथ काम करना बंद हो गया। शिवम 15 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहे। उनके पिता बाबूराम ने बच्छरौन पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की और परिवार पर मामले को वापस लेने का दबाव डाला जा रहा है।
भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा की और चेतावनी दी कि यदि आरोपियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो वे राज्य सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेंगे। स्थानीय दलित अधिकार संगठनों ने इसे स्पष्ट जातिवादी उत्पीड़न करार दिया और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अमरोहा पुलिस ने शिकायत दर्ज करने की पुष्टि की है और बताया कि मामले की जांच एससी/एसटी अधिनियम के तहत जारी है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि फरार आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।
इन घटनाओं ने उत्तर प्रदेश में दलितों के खिलाफ बढ़ते जातिवादी हमलों और पुलिस की निष्क्रियता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय समाज और अधिकार संगठनों की मांग है कि राज्य सरकार इन मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई करे, ताकि दलितों को न्याय मिल सके और समाज में समानता की भावना मजबूत हो।
