भाकपा (माले) के 58वें स्थापना दिवस पर संघर्ष तेज करने का संकल्प, पटना में गूंजा आंदोलन का संदेश

भाकपा (माले) ने मंगलवार को अपने 58वें स्थापना दिवस को बिहार सहित देशभर में विविध कार्यक्रमों के साथ उत्साहपूर्वक मनाया। यह अवसर विश्व सर्वहारा आंदोलन के प्रणेता व्लादिमीर लेनिन के जन्मदिवस के साथ भी जुड़ा रहा, जिससे कार्यक्रम का वैचारिक महत्व और अधिक बढ़ गया।

पटना स्थित राज्य कार्यालय में आयोजित मुख्य समारोह में पार्टी के राज्य सचिव कॉमरेड कुणाल ने ध्वजारोहण किया। इस दौरान केंद्रीय कमिटी द्वारा जारी 22 अप्रैल के आह्वान का पाठ भी किया गया, जिसमें संगठन को जमीनी संघर्षों को और तेज करने की अपील की गई है।

कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं कॉमरेड केडी यादव, कॉमरेड एसके शर्मा, कॉमरेड मंजू प्रकाश, कॉमरेड संतलाल सहित आइसा के प्रसेनजीत कुमार, प्रो. शोभन चक्रवर्ती, प्रो. सतीश कुमार, प्रकाश कुमार, अभय पांडेय, पाल बिहारी लाल, संजय यादव, विनय कुमार, प्रीति पटेल, सबा आफरीन और प्रिया गुप्ता समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं समर्थक उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में राज्य सचिव कॉमरेड कुणाल ने कहा कि वर्तमान समय वैश्विक अस्थिरता और गंभीर आर्थिक संकट का दौर है, जिसका सीधा असर भारत के मजदूरों, प्रवासी कामगारों और आम जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके कारण देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी चुनौतियों और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने बढ़ती महंगाई, ईंधन और खाद संकट तथा श्रम कानूनों में किए जा रहे बदलावों को लेकर गहरी चिंता जताई। उनके अनुसार, इन नीतियों के खिलाफ मजदूर वर्ग में व्यापक असंतोष है, जबकि किसान समुदाय भी व्यापारिक समझौतों को लेकर संघर्ष की तैयारी में है।

कॉमरेड कुणाल ने मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर किए जाने और शिक्षा क्षेत्र में हो रहे बदलावों को सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि सामाजिक न्याय के मुद्दों को फिर से केंद्र में लाया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि आने वाला समय सामाजिक आंदोलनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि 1927 के महाड़ सत्याग्रह और मनुस्मृति दहन की शताब्दी तथा समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की जयंती जैसे ऐतिहासिक अवसर जनचेतना को नई दिशा देंगे।

पार्टी ने अपने स्थापना दिवस पर देश को वास्तविक अर्थों में संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। साथ ही महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू करने और इस मुद्दे पर राजनीतिक भ्रम फैलाने के प्रयासों को रोकने की मांग भी की गई।

कार्यक्रम के अंत में कार्यकर्ताओं ने संगठन को और मजबूत करने तथा जनता के मुद्दों पर संघर्ष को धार देने का सामूहिक संकल्प लिया।

पटना महानगर के दीघा, आशियाना, गोविंदपुर, न्यू मार्केट और पटना जंक्शन सहित कई इलाकों में भी स्थापना दिवस के अवसर पर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए।

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