महिला आरक्षण के मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। भाकपा–माले और अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (AIPWA) के आह्वान पर शुक्रवार को बिहार के कई जिलों में राज्यव्यापी विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए गए। राजधानी पटना में जीपीओ गोलंबर से बुद्ध स्मृति पार्क तक निकाले गए मार्च ने एक बड़ी सभा का रूप ले लिया, जिसमें महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की जोरदार मांग उठी।
प्रदर्शन का नेतृत्व AIPWA की महासचिव मीना तिवारी समेत कई प्रमुख नेताओं ने किया। मार्च में शामिल कार्यकर्ताओं ने “महिला आरक्षण तुरंत लागू करो”, “दलित–पिछड़ी महिलाओं को समुचित हिस्सेदारी दो” और “जातीय जनगणना पूरी कर लागू करो” जैसे नारे लगाए। पटना के अलावा आरा, अरवल, दरभंगा, सिवान, गया, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, बिहारशरीफ और गोपालगंज सहित कई जिलों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण को लेकर जनता के बीच भ्रामक प्रचार कर रही है। उनका कहना था कि सितंबर 2023 में संसद द्वारा महिला आरक्षण विधेयक पारित हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद इसे लागू करने में देरी की जा रही है। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि हाल में जो विधेयक गिरा, वह परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़ा था, न कि महिला आरक्षण से।
वक्ताओं ने यह भी सवाल उठाया कि महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन और नई जनगणना को अनिवार्य शर्त क्यों बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक, यह प्रक्रिया जानबूझकर लंबी खींची जा रही है ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके। उन्होंने कहा कि इतिहास में आरक्षण लागू करने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने जैसी शर्त पहले कभी नहीं रही।
बिहार विधानसभा में विपक्ष के खिलाफ लाए गए निंदा प्रस्ताव की भी सभा में कड़ी आलोचना की गई। वक्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करने और विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास बताया। उनका आरोप था कि सरकार असली मुद्दों—महिला आरक्षण, सामाजिक न्याय, बेरोजगारी और महंगाई—से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के कदम उठा रही है।
सभा में ‘कोटा के भीतर कोटा’ की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि दलित और पिछड़ी महिलाओं की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित किए बिना महिला आरक्षण अधूरा रहेगा।
कार्यक्रम के अंत में नेताओं ने घोषणा की कि भाजपा के कथित भ्रामक प्रचार के खिलाफ राज्यभर में व्यापक जनअभियान चलाया जाएगा। प्रखंड मुख्यालयों से लेकर गांवों और चौक-चौराहों तक नुक्कड़ सभाओं के जरिए लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है।
