भाकपा-माले का 12वां बिहार राज्य सम्मेलन तीन दिनों तक चली व्यापक राजनीतिक बहस, संगठनात्मक समीक्षा और आगामी रणनीति निर्धारण के बाद रविवार को संपन्न हो गया। सम्मेलन में राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, जनआंदोलनों के विस्तार और संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
सम्मेलन के अंतिम दिन सर्वसम्मति से 107 सदस्यीय नई राज्य कमिटी का गठन किया गया, जिसमें कॉमरेड कुणाल को एक बार फिर राज्य सचिव चुना गया। नई कमिटी में 27 नए सदस्यों को शामिल किया गया है, जबकि 13 साथियों को आमंत्रित सदस्य के रूप में स्थान दिया गया है। पार्टी नेतृत्व ने इसे संगठन में नई ऊर्जा और नई पीढ़ी की भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाकपा-माले महासचिव CPI(ML) Liberation के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि देश और बिहार इस समय गंभीर राजनीतिक दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी लोकतांत्रिक अधिकारों, संविधान और गरीबों के हितों पर लगातार हमले कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पार्टी का यह सम्मेलन “बुलडोज़र राज”, दमनकारी नीतियों और लोकतंत्र विरोधी प्रवृत्तियों के खिलाफ जनता के संघर्ष को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प है। भट्टाचार्य ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव, टोला-मोहल्ला और बस्तियों तक पहुंचकर मजदूरों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और छात्रों के मुद्दों पर आंदोलन को तेज करें।
सम्मेलन के पर्यवेक्षक वी. शंकर ने कहा कि बिहार हमेशा देश की राजनीति को दिशा देने वाला राज्य रहा है और यहां की जनता लोकतंत्र एवं अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्षशील रही है। उन्होंने व्यापक लोकतांत्रिक एकता की आवश्यकता पर बल दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने दक्षिण भारत की राजनीतिक स्थिति का उल्लेख करते हुए DMK का संदर्भ दिया और कहा कि धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक शक्तियों को और अधिक एकजुट होने की जरूरत है।
सम्मेलन में पार्टी की कार्य रिपोर्ट ध्वनिमत से पारित की गई तथा आगामी संघर्षों की दिशा में 10 सूत्री कार्यभार को मंजूरी दी गई। इसके तहत 20 मई को प्रस्तावित ग्रामीण मजदूर हड़ताल को व्यापक समर्थन देने तथा उसी दिन से राज्य के 10 लाख गरीब परिवारों तक जनसंपर्क अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।
सम्मेलन में पारित प्रस्तावों में महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू करने, जाति आधारित जनगणना कराने, समता आंदोलन के विस्तार तथा कथित “बुलडोज़र कार्रवाइयों” के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने की मांग शामिल है। साथ ही राज्य के शिक्षा मंत्री के हालिया बयान की कड़ी निंदा की गई, जिसे सम्मेलन में शिक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया गया।
संगठनात्मक मजबूती पर जोर देते हुए सम्मेलन में यह भी निर्णय लिया गया कि युवाओं, महिलाओं और जमीनी आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं को नेतृत्व में अधिक अवसर दिए जाएंगे।
सम्मेलन का समापन इंकलाबी नारों के बीच हुआ, जिसमें लोकतंत्र, संविधान और जनाधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया गया।
