इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में शामिल भाकपा-माले (CPIML Liberation) ने अब तक अपनी 18 सीटों और उनके उम्मीदवारों का पक्का एलान कर दिया है, जबकि बाकी सीटों पर बातचीत जारी है। पार्टी की संभावना कुल 21 सीटों तक चुनाव लड़ने की है, लेकिन अंदाजा जताया जा रहा है कि ज़्यादा संभावना है कि अंतिम संख्या 19 सीटों तक ही सीमित रह सकती है।
विशेषकर औराई विधानसभा सीट को लेकर मुस्लिम समाजिक नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से जोरदार दबाव है कि इसे CPIML को दिया जाए और वहां से अफ़ताब आलम को उम्मीदवार बनाया जाए। इस पर बिहार में मुस्लिम नेताओं और समाजिक कार्यकर्ताओं के बीच लगातार चर्चा चल रही है।
मुस्लिम व बहुजन सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय एक्टीविस्ट व ‘संघर्ष संवाद’ के संयोजक मुस्ताक़िम सिद्दिक़ी ने कहा कि “सवाल मेरा CPIML Liberation, बिहार यानी माले से है — लेकिन जवाब की ज़िम्मेदारी तेजस्वी यादव और RJD की भी है। अगर माले की सीट माले की है, तो उस पर राजद की नज़र क्यों? गठबंधन सिर्फ़ सीटों का गणित नहीं, भरोसे का समीकरण भी है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अफ़ताब आलम जैसी जमीनी पहचान वाले नेताओं को दरकिनार किया गया, तो यह सिर्फ़ एक उम्मीदवार का नुकसान नहीं, बल्कि पूरे महागठबंधन की साख पर सवाल खड़ा करेगा।
मुस्ताक़िम सिद्दिक़ी ने आगे लिखा “औराई की जनता सब देख रही है — यह सिर्फ़ विधानसभा सीट नहीं, बल्कि गठबंधन की ईमानदारी की कसौटी है। अगर भरोसे को दरकिनार किया गया, तो नुकसान सिर्फ़ एक उम्मीदवार का नहीं, बल्कि पूरे INDIA गठबंधन की साख का होगा।”
पक्की हुई 18 सीटें और उनके उम्मीदवार:
1.तरारी (196) – मदन सिंह चन्द्रवंशी
2.अगिआंव SC (195) – शिवप्रकाश रंजन
3.आरा (194) – कयामुद्दीन अंसारी
4.डुमरांव (201) – अजीत कुमार सिंह उर्फ अजीत कुशवाहा
5.काराकाट (213) – अरुण सिंह
6.अरवल (214) – महानंद सिंह
7.घोषी (217) – रामबली सिंह यादव
8.पालीगंज (190) – संदीप सौरभ
9.फुलवारी (188) – गोपाल रविदास
10.दीघा (181) – दिव्या गौतम
11.दरौली (107) – सत्यदेव राम
12.जिरादेई (106) – अमरजीत कुशवाहा
13.दरौंदा (109) – अमरनाथ यादव
14.भोरे (103) – जितेंद्र पासवान
15.सिकटा (09) – वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता
16.वारिसनगर (132) – फूलबाबू सिंह
17.कल्याणपुर (131) – रंजीत राम
18.बलरामपुर (65) – महबूब आलम
अभी भी 19वीं, 20वीं और 21वीं सीटों पर अंतिम फैसला बाकी है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि औराई सीट को लेकर अफ़ताब आलम को उम्मीदवार बनाए जाने की अपील बहुत मजबूत है, और यह मुद्दा महागठबंधन के भीतर भरोसे और साझेदारी की परीक्षा बन सकता है।
