देशभर में पर्यावरण बचाने की मुहिम को समर्थन देने के लिए भाकपा माले ने आज पटना के बुद्ध स्मृति पार्क के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का उद्देश्य अरावली, ग्रेट निकोबार, हिमालय और हसदेव अरण्य जैसे महत्वपूर्ण जंगलों और पहाड़ों को बड़े पूंजीपतियों के हवाले करने और प्राकृतिक संसाधनों के विनाश के खिलाफ जनता को जागरूक करना था।
भाकपा माले के पोलित ब्यूरो सदस्य मीना तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार देश की जनता के हित में नहीं बल्कि अडानी-अंबानी जैसे बड़े पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ की नीति के नाम पर जंगल, पहाड़ और जलवायु को गंभीर खतरे में डाल रही है।
पूर्व विधायक महबूब आलम ने कहा कि पूरे देश में जल, जंगल और जमीन को बड़े पूंजीपतियों के हवाले किया जा रहा है, जबकि जनता इसके खिलाफ आवाज उठा रही है। उन्होंने विशेष रूप से उत्तराखंड की चारधाम सड़क परियोजना और ग्रेट निकोबार स्वैप प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए इसे पर्यावरणीय धोखाधड़ी बताया।
महबूब आलम ने बताया कि ग्रेट निकोबार के 130 वर्ग किलोमीटर प्राकृतिक उष्णकटिबंधीय जंगल को नष्ट कर दिया गया, जबकि इसके लिए हरियाणा की अरावली में पौधारोपण दिखाया गया, जो पूरी तरह अलग पारिस्थितिकी और जलवायु में स्थित है।
कार्यक्रम का संचालन भाकपा माले के नगर सचिव जितेंद्र कुमार ने किया। प्रदर्शन में भाकपा माले के वरिष्ठ नेता केडी यादव, सामाजिक कार्यकर्ता अशरफी सदा, आइसा नेता कुमार दिव्यम, केंद्रीय कमेटी सदस्य सरोज चौबे, शहजादे आलम, संजय यादव, शंभूनाथ मेहता, अनुराधा, राखी मेहता, आइसा नेत्री सबा, संस्कृतिकर्मी प्रमोद यादव, आरवाईए नेता विनय कुमार, कर्मचारी नेता रामबली प्रसाद सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
भाकपा माले ने पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ को बर्दाश्त न करने का संकल्प दोहराया और सरकार से अरावली की नई परिभाषा पर तुरंत रोक लगाने की मांग की।
