
इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
बिहार में बीजेपी-जेडीयू सरकार के ‘सुशासन’ के दावे पुलिसिया अत्याचार और प्रशासनिक नाकामी के बीच खोखले साबित हो रहे हैं। हाल ही में मधुबनी और मुजफ्फरपुर की घटनाओं ने राज्य में पुलिसिया आतंक की तस्वीर उजागर कर दी है। सीपीआई(एमएल),आरवाईए और इंसाफ मंच के नेताओं ने मौलाना फिरोज और शिवम के परिवारों से मुलाकात कर उनकी पीड़ा को सामने रखा और सरकार पर सवाल उठाए।
*मधुबनी में मौलाना फिरोज पर पुलिस की बर्बरता
मधुबनी जिले के बेनीपट्टी बाजार में 29 जनवरी को मौलाना मोहम्मद फिरोज को पुलिस ने ‘वाहन चेकिंग’ के नाम पर रोका। उनकी मुस्लिम पहचान के कारण पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और अभद्र व्यवहार किया। उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लिया गया। उनके साले, जो जेडीयू नेता हैं, ने पुलिस को फिरौती देकर देर शाम उनकी रिहाई करवाई।
*मुजफ्फरपुर में शिवम की हिरासत में मौत
4 फरवरी को मुजफ्फरपुर के कांटी थाना क्षेत्र के 18 वर्षीय शिवम झा को पुलिस ने मोटरसाइकिल चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया। जब परिवार पुलिस द्वारा मांगी गई फिरौती देने में असमर्थ रहा, तो शिवम को थाने में लगातार दो दिनों तक यातना दी गई। 6 फरवरी की सुबह शिवम की मौत हो गई। पुलिस इसे आत्महत्या बता रही है, लेकिन परिवार और स्थानीय लोगों का मानना है कि यह हिरासत में हत्या का मामला है।
*सीपीआई(एमएल), आरवाईए और इंसाफ मंच का दौरा
घटनाओं के बाद सीपीआई(एमएल) के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य की अगुवाई में पार्टी के वरिष्ठ नेता धीरेंद्र झा, शशि यादव, आरवाईए अध्यक्ष आफताब आलम और इंसाफ मंच के नेता नियाज अहमद, पप्पू खान, सूरज कुमार सिंह, फहद जमां और असलम रहमानी ने मधुबनी और मुजफ्फरपुर का दौरा किया। उन्होंने मौलाना फिरोज और शिवम के परिवारों से मुलाकात की और घटनाओं की सच्चाई को सामने लाने का आश्वासन दिया। नेताओं ने इन मामलों को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल खड़े किए।
*सरकार की नाकामी और जनता की मांग
सीपीआई(एमएल), आरवाईए और इंसाफ मंच ने राज्य में बढ़ते पुलिसिया आतंक की निंदा की और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। नेताओं का कहना है कि सरकार की चुप्पी ने ‘सुशासन’ के दावों को झूठा साबित कर दिया है।