दिल्ली हाइकोर्ट ने पीएफआई के पूर्व अध्यक्ष ई-अबूबकर के इलाज की रिपोर्ट मांगा,एनआईए को भी नोटिस

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को तिहाड़ जेल में बंद पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के पूर्व चेयरमैन ई. अबूबकर के इलाज से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जेल प्रशासन को मेडिकल रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। ई अबूबकर ने निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति मांगी है। फिलहाल उनका इलाज एम्स (AIIMS) में चल रहा है।

न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा ने मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा और अगली सुनवाई की तारीख 26 नवंबर 2025 तय की।

ई अबूबकर के वकील का कहना है कि जेल में मिल रहा इलाज नाकाफी है और जेल स्टाफ उनके प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया अपना रहा है। वकील ने दलील दी कि मरीज को अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का संवैधानिक अधिकार है।

वहीं, NIA के विशेष लोक अभियोजक राहुल त्यागी ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पहले से ही देश के सर्वोच्च चिकित्सा संस्थान एम्स में इलाज करवा रहा है। उन्होंने कहा कि एम्स की मेडिकल रिपोर्ट ही स्पष्ट कर देगी कि किसी अतिरिक्त इलाज की ज़रूरत है या नहीं।

NIA ने ई अबूबकर को 22 सितंबर 2022 को गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि “उन्होंने PFI के जरिए युवाओं की भर्ती, कट्टरपंथ और आतंकी प्रशिक्षण कैंप आयोजित करने जैसे कामों की निगरानी की। साथ ही, वे संगठन के खातों के अधिकृत हस्ताक्षरी भी थे, जिनसे आतंकी गतिविधियों के लिए धन का इस्तेमाल हुआ।”

इससे पहले, जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने एम्स की मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद कहा था कि फिलहाल उन्हें रिहा करने का आधार नहीं है। हालांकि, ई अबूबकर की पत्नी का आरोप है कि 10 डॉक्टरों की मेडिकल बोर्ड द्वारा दी गई रिपोर्ट उनके वास्तविक स्वास्थ्य की स्थिति को नहीं दर्शाती और इस पर केंद्रीय एजेंसियों का दबाव था।

केंद्र सरकार ने 28 सितंबर 2022 को UAPA की धारा 3(1) के तहत PFI और इसकी 8 सहयोगी संस्थाओं को ‘गैरकानूनी संगठन’ घोषित कर दिया था। उसके बाद NIA और ED ने देशभर में छापेमारी कर कई लोगों को गिरफ्तार किया। गृह मंत्रालय का कहना था कि PFI की गतिविधियाँ देश की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं और साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ सकती हैं।

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