लापता लोगों के आंकड़ों से हिली दिल्ली, SDPI सचिव आतिका साजिद का तीखा बयान

देश की राजधानी दिल्ली में लापता हो रहे लोगों की बढ़ती संख्या ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) की राष्ट्रीय सचिव आतिका साजिद ने जनवरी 2026 के पहले पंद्रह दिनों में दिल्ली से 800 से अधिक लोगों के लापता होने पर गहरा आक्रोश और चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसे प्रशासनिक विफलता और नागरिक सुरक्षा में गंभीर चूक करार दिया है।

SDPI की ओर से जारी बयान में बताया गया कि लापता हुए लोगों में महिलाओं और लड़कियों की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक है। कुल मामलों में करीब दो-तिहाई, यानी 509 महिलाएं और लड़कियां शामिल हैं। औसतन प्रतिदिन 54 लोगों का लापता होना राजधानी में कानून-व्यवस्था की भयावह तस्वीर पेश करता है। इन मामलों में 191 नाबालिग भी शामिल हैं, जिनमें 146 लड़कियां हैं, जो बच्चों और महिलाओं की अत्यधिक असुरक्षा को उजागर करता है।

हालांकि अधिकारियों ने अब तक 235 लोगों का पता लगा लिया है, लेकिन 572 लोग अब भी लापता हैं। आतिका साजिद ने कहा कि इन आंकड़ों के पीछे सैकड़ों परिवारों का दर्द, असहायता और अनिश्चितता छिपी हुई है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

SDPI ने स्पष्ट किया कि यह संकट कोई एक बार की घटना नहीं है, बल्कि पिछले एक दशक से जारी एक खतरनाक प्रवृत्ति का हिस्सा है। पार्टी के अनुसार, बीते दस वर्षों में दिल्ली में करीब 2.30 लाख लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई है, जिनमें से लगभग 52 हजार मामले आज भी अनसुलझे हैं। केवल वर्ष 2025 में ही 24,500 से अधिक लोग लापता हुए, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से ज्यादा रही।

जनवरी 2026 के पूरे महीने में 1,777 लापता मामलों के दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। SDPI का कहना है कि भले ही यह आंकड़ा औसतन दर्ज होने वाले 2,000 मासिक मामलों से कुछ कम हो, लेकिन जब मानव जीवन का सवाल हो तो किसी भी संख्या को कम नहीं आंका जा सकता। आउटर नॉर्थ जैसे जिलों में स्थिति और भी गंभीर बताई गई है, जहां सामाजिक और आर्थिक उपेक्षा ने संकट को और गहरा कर दिया है।

आतिका साजिद ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार और प्रशासन की “लगातार उदासीनता” की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा को राजनीतिक स्वार्थ या प्रशासनिक जड़ता की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता। SDPI ने तत्काल न्यायिक निगरानी, उच्च जोखिम वाले इलाकों में मजबूत निगरानी व्यवस्था और मानव तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए प्रभावी अंतरराज्यीय समन्वय की मांग की है।

पार्टी ने सरकार से समुदाय आधारित जागरूकता कार्यक्रम, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और पीड़ित संरक्षण प्रणालियों को तुरंत लागू करने की अपील की है। SDPI ने अंत में न्याय, समानता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए इस बढ़ते लापता होने के संकट के खिलाफ एकजुट राष्ट्रीय पहल का आह्वान किया, जिसे उसने देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए गंभीर खतरा बताया।

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