लेबनानी मूल के मानवाधिकार कार्यकर्ता मोहम्मद सफ़ा ने संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए ईरान पर संभावित परमाणु हमले की आशंका जताई है। अपने हालिया बयान में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में अपनी सभी जिम्मेदारियों को निलंबित करने की घोषणा की है।
मोहम्मद सफ़ा ने कहा कि वैश्विक स्थिति “बेहद गंभीर” होती जा रही है और दुनिया इस खतरे को सही तरीके से समझ नहीं रही। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य टकराव परमाणु हथियारों के इस्तेमाल तक पहुँच सकता है। उनके अनुसार, यदि ऐसा होता है तो तेहरान जैसे घनी आबादी वाले शहरों में भारी जन-धन की हानि हो सकती है, जिसे उन्होंने “मानवता के खिलाफ अपराध” बताया।
अपने बयान में मोहम्मद सफ़ा ने आरोप लगाया कि संयुक्त राष्ट्र के कुछ वरिष्ठ अधिकारी “शक्तिशाली लॉबी” के प्रभाव में काम कर रहे हैं और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि Gaza Strip (गाज़ा पट्टी) में जारी घटनाओं को “जनसंहार” और लेबनान की स्थिति को “युद्ध अपराध” तथा “नस्लीय सफ़ाई” के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा। साथ ही, ईरान के खिलाफ संभावित युद्ध को भी अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध घोषित करने से परहेज़ किया जा रहा है।
मोहम्मद सफ़ा ने अप्रत्यक्ष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहराने से बचाया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने किसी भी देश पर सीधे तौर पर परमाणु हमले की योजना का आरोप नहीं लगाया।
अपने पत्र में उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियाँ मिलीं, आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित किया गया। उन्होंने कहा कि यह सब संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक प्रणाली के तहत नहीं, बल्कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है।
मोहम्मद सफ़ा के इन आरोपों और विशेष रूप से परमाणु हमले की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। यदि ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न होती है, तो मध्य-पूर्व क्षेत्र में संघर्ष के और व्यापक होने की आशंका है, जिससे वैश्विक शांति और स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु हथियारों का उपयोग न केवल बड़े पैमाने पर मानवीय तबाही लाएगा, बल्कि इसके दीर्घकालिक पर्यावरणीय और आर्थिक परिणाम भी अत्यंत गंभीर होंगे।
हालांकि, मोहम्मद सफ़ा द्वारा जताई गई परमाणु हमले की आशंका और अन्य आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संयुक्त राष्ट्र या अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वर्तमान परिदृश्य में यह मामला न केवल एक व्यक्ति के आरोपों तक सीमित है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी व्यापक बहस को जन्म दे रहा है।
