इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
बिहार के गया जिले के अतरी विधानसभा क्षेत्र के गहलौर में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) ने कार्यकर्ता सम्मेलन के साथ झूमर महोत्सव का आयोजन किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भाग लिया और ढोल-मांझर बजाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
कार्यक्रम में पारंपरिक झूमर और लौंडा नाच का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। उपस्थित जनता ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम का आनंद लिया और झूमर पर नृत्य कर इसे जीवंत किया।
केंद्रीय मंत्री मांझी ने झूमर को भुईया और मुसहर समुदायों की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर बताया। उन्होंने कहा, “पहले हर गांव में 15 दिनों तक झूमर का आयोजन होता था, लेकिन अब यह परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त हो रही है। हमारी प्रतिज्ञा है कि इसे दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेंगे।”
अपने संबोधन में मांझी ने अतरी विधानसभा क्षेत्र से अपने गहरे नाते को याद किया और कहा कि उनका घर, ससुराल और ननिहाल यहीं है। 81 वर्ष की उम्र में भी उनकी इच्छा है कि उनकी पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा अतरी से विधानसभा चुनाव जीते। उन्होंने आठ बार विधानसभा चुनाव जीतने का भी जिक्र किया।
राजद नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए मांझी ने कहा कि उनके पिता लालू यादव ने कभी कमजोर वर्गों को पढ़ने-लिखने की सलाह दी थी, लेकिन उनके मंत्रिमंडल ने चरवाहा विद्यालय खोलकर और लाठी में तेल पिलाकर मजाक उड़ाया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब तेजस्वी ने 35 विधायकों के साथ उन्हें हटाने की कोशिश की थी।
पाकिस्तान को लेकर मांझी ने कहा कि भारत के सामने कोई भी शक्ति टिक नहीं सकती। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदुर के जरिए आतंकवादी अड्डों को नष्ट किया गया, लेकिन नागरिकों पर हमला नहीं किया गया। मांझी ने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान कोई हरकत करता है, तो भारत की सैन्य ताकत उसे पूरी तरह समाप्त कर सकती है।
उन्होंने भारत की सैन्य शक्ति की भी सराहना करते हुए कहा कि समुद्र, आकाश और जमीन तीनों दिशाओं से देश पूरी ताकत से हमला करने में सक्षम है। मांझी ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने पाकिस्तान को माफ किया है, लेकिन अगर कोई गलत कदम उठाया गया तो भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”
कार्यक्रम में मांझी ने आगामी विधानसभा चुनावों में 15-20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की बात कही और कहा कि यदि गठबंधन में यह सीटें नहीं मिलती हैं, तो उनकी पार्टी अकेले 50-100 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।
कार्यक्रम में मांझी के साथ पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद थे, जिन्होंने आगामी चुनावों की रणनीति और योजनाओं पर चर्चा की। इस आयोजन ने गहलौर घाटी में स्थानीय संस्कृति और राजनीति के संगम को उजागर किया और आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा तय करने का संकेत दिया।
