अमेरिका और इज़राइल की ओर से जारी सैन्य कार्रवाई के बीच मंगलवार को ईरान के विभिन्न शहरों में सरकार-समर्थक रैलियाँ आयोजित की गईं। राजधानी तेहरान सहित मशहद, इस्फहान और तबरीज़ में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रति एकजुटता प्रकट की।
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय ध्वज लहराते हुए विदेशी हस्तक्षेप के विरोध में नारे लगाए। कई स्थानों पर सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई थी और प्रमुख चौक-चौराहों पर निगरानी बढ़ा दी गई। प्रशासन ने कहा कि रैलियाँ शांतिपूर्ण रहीं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि देश “अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध” है। मंत्रालय ने अमेरिका और इज़राइल पर क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, अमेरिकी और इज़राइली अधिकारियों का कहना है कि उनकी सैन्य कार्रवाई ईरान की सामरिक क्षमताओं को सीमित करने के उद्देश्य से की जा रही है।
सैन्य हमलों का सिलसिला जारी
स्थानीय मीडिया के अनुसार, हाल के दिनों में कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। कुछ इलाकों से विस्फोटों और हवाई हमलों की खबरें भी आई हैं। हालांकि हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं और स्वतंत्र पुष्टि सीमित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव अब व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव डाल सकता है। पश्चिम एशिया पहले ही अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है और ताज़ा घटनाक्रम ने ऊर्जा बाजार, समुद्री मार्गों और कूटनीतिक समीकरणों को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपील
संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है। कुछ देशों में ईरान के समर्थन और विरोध में प्रदर्शन भी देखे गए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि यह संघर्ष सीमाओं से परे वैश्विक प्रतिक्रिया पैदा कर रहा है।
घरेलू संदेश
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि मौजूदा संकट के बीच आयोजित रैलियाँ सरकार के लिए घरेलू समर्थन का प्रदर्शन हैं। सड़कों पर उमड़ी भीड़ ने स्पष्ट संकेत दिया कि बाहरी दबाव के बीच राष्ट्रीय एकता का संदेश देने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल क्षेत्र में तनाव बरकरार है और आने वाले दिनों में सैन्य तथा कूटनीतिक गतिविधियों की दिशा पर अंतरराष्ट्रीय निगाहें टिकी रहेंगी।