मध्य-पूर्व में चल रहा संघर्ष अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। क़तर, तुर्की और इराक ने एक के बाद एक बयान जारी कर युद्ध और सुरक्षा की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट अब क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
क़तर: डिप्लोमेसी प्राथमिक, पर जवाब देने को तैयार
क़तर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि कई सालों से दी गई चेतावनियाँ अनसुनी रह गईं, जिसके परिणामस्वरूप यह संघर्ष अब अनियंत्रित क्षेत्रीय युद्ध में बदल गया है। क़तर ने स्पष्ट किया कि वह इस युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं होगा, लेकिन अगर हमला हुआ तो पूरी ताकत से जवाब देगा।
उन्होंने कहा कि क़तर सुरक्षा और कूटनीति को प्राथमिकता दे रहा है, लेकिन यदि कोई हमला किया गया तो कड़ा जवाब देना देश का अधिकार होगा। उन्होंने कहा “हमने कई साल पहले चेतावनी दी थी। अब वही चेतावनी सच साबित हो रही है।”
तुर्की: युद्ध में शामिल नहीं, सीमाओं की सुरक्षा सतर्क
तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश किसी पड़ोसी देश के खिलाफ युद्ध में शामिल नहीं होगा। उन्होंने बताया कि तुर्की की सीमा और वायु सुरक्षा २४ घंटे सक्रिय रहेगी और सभी सुरक्षा उपाय पूर्ण रूप से लागू हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश को किसी भी तरह के आंतरिक संघर्ष या दुश्मन के जाल में फंसने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य तुर्की और उसके नागरिकों को किसी भी खतरे से सुरक्षित रखना है। उन्होंने कहा”तुर्की अब पुराना तुर्की नहीं रहा। हर योजना और रणनीति को इसी वास्तविकता के आधार पर तैयार किया जाना चाहिए। हमारा लक्ष्य नागरिकों की सुरक्षा और पूरे देश की शांति सुनिश्चित करना है।”
उन्होंने यह भी कहा कि तुर्की न्याय, अंतरराष्ट्रीय कानून और स्थिरता के पक्ष में खड़ा है और सभी विवादों का समाधान बातचीत से चाहता है।
इराक: हमले की भूमि नहीं बनने देंगे
इराक के प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश किसी भी हमले की भूमि नहीं बनेगा। उन्होंने मध्य-पूर्व और अन्य देशों के साथ कूटनीतिक गठबंधन बनाने का प्रस्ताव रखा ताकि युद्ध को बातचीत और कूटनीति के जरिए रोका जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस संघर्ष का असर तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ेगा। वैश्विक तेल की कीमतें पहले ही उच्च स्तर के करीब हैं। तुर्की और इराक अपनी सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं, लेकिन मिसाइल और सैन्य गतिविधियों का फैलाव दिखाता है कि संकट अब किसी एक देश तक सीमित नहीं है।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह संघर्ष बढ़ा तो इसका प्रभाव यूरोप और अंतरराष्ट्रीय शांति पर भी पड़ेगा।