मध्य‑पूर्व में हालात और जटिल हो गए हैं। फ़िलिस्तीनी सशस्त्र समूह हमास ने अपने सहयोगी ईरान से खुलकर कहा है कि वह पड़ोसी खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों को तुरंत रोक दे। साथ ही हमास ने ईरान के आत्म‑रक्षा के अधिकार को भी दोहराया।
हमास ने 14 मार्च को जारी बयान में कहा कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार अपनी सुरक्षा का अधिकार है, लेकिन क्षेत्रीय देशों को निशाना बनाना क्षेत्रीय भाईचारे और शांति के हित में नहीं है। बयान में कहा गया कि सभी देशों को मिलकर युद्ध को समाप्त करना और स्थायी समाधान स्थापित करना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान ऐतिहासिक मोड़ है। हमास परंपरागत रूप से ईरान का समर्थन करती रही है, लेकिन अब वह खाड़ी देशों के साथ राजनीतिक और आर्थिक संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है।
ईरान‑अमेरिका‑इज़राइल संघर्ष
28 फरवरी 2026 से शुरू हुए अमेरिकी और इज़राइली सैन्य अभियान के बाद ईरान ने खाड़ी में मिसाइल और ड्रोन हमले तेज़ कर दिए हैं। हमले न केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं बल्कि खाड़ी देशों के तट और आसमान पर भी असर डाल रहे हैं।
ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी ठिकानों और तेल सुविधाओं को चेतावनी दी है कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इससे क्षेत्र की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा झटका लगा है।
मानवीय संकट और होर्मुज़ जलडमरूमध्य
संयुक्त राष्ट्र ने आग्रह किया है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से मानवीय सहायता सुरक्षित रूप से गुजरने दी जाए। जलडमरूमध्य में तनाव के कारण खाद्य और चिकित्सा सामग्री जैसी जरूरी आपूर्ति बाधित हो रही है।
यह मार्ग विश्व के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% संभालता है, इसलिए किसी भी बाधा का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
भारत और खाड़ी की सुरक्षा
हाल ही में फारस की खाड़ी में संकट के बीच भारतीय एलपीजी जहाज़ सुरक्षित रूप से होर्मुज़ पार कर चुके हैं और सभी नाविक सुरक्षित बताए जा रहे हैं। इससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति और बाजारों में राहत की उम्मीद जगी है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि हमास का यह बयान संकेत देता है कि क्षेत्रीय समूह अब संपूर्ण युद्ध को खाड़ी देशों तक फैलने से रोकना चाहते हैं। संयम और कूटनीति की भूमिका अब और महत्वपूर्ण हो गई है।