अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमलों के सातवें दिन ईरान की राजधानी तेहरान और देश के अन्य बड़े शहरों में भीषण बमबारी जारी रही। मीडिया के अनुसार यह अब तक का सबसे तेज़ और व्यापक हमला था, जिसमें आवासीय इलाके, अस्पताल, स्कूल और सांस्कृतिक स्थल भी निशाने पर रहे।
भारी विस्फोट और नागरिक नुकसान
तेहरान में पास्टर स्ट्रीट, विश्वविद्यालय परिसर और संवेदनशील सरकारी क्षेत्रों में भारी धमाके हुए। विस्फोटों की आवाज़ पूरे शहर में सुनाई दी और धुएँ के बादल ने राजधानी को घेर लिया।
ईरान की सरकार और रेड क्रिसेंट के आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 1,332 लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें 181 बच्चे शामिल हैं। मिनाब में एक बालिका प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले में 175 बच्चों की मौत हुई।
संयुक्त ऑपरेशन “एपिक फ़्यूरी”
अमेरिका और इज़राइल ने ऑपरेशन “एपिक फ़्यूरी” के तहत ईरान के मिसाइल बंकर, सैन्य ठिकाने और कमांड सेंटरों पर हमले तेज़ कर दिए हैं। बी-2 बॉम्बर द्वारा गहरे दफन बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर पर “पैठने वाले” बम गिराए गए।
इस्राइली सेना ने भी तेहरान और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए।
ईरान का जवाब
ईरानी सेना ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की नई लहर शुरू की। कुवैत, कतर, सऊदी अरब और बहरीन में अमेरिकी और इज़राइली ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरानी सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारिज़ानी ने चेतावनी दी कि किसी भी अमेरिकी जमीनी हमले की स्थिति में देश पूरी तरह तैयार है।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में हिज़बुल्लाह और इस्राइली सेनाओं के बीच संघर्ष जारी है। स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ में जहाज़ों की आवाजाही ठहर गई है, जिससे तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
तेहरान और अन्य शहरों के अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र भी हमलों से प्रभावित हुए। WHO ने कई स्वास्थ्य संस्थाओं पर हमले की पुष्टि की और बताया कि इसमें चार स्वास्थ्य कर्मी मारे गए और 25 घायल हुए।
अमेरिकी और ईरानी बयान
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना को जमीन पर तैनात करना “समय की बर्बादी” होगी। वहीं ईरान ने दावा किया कि उसकी वायु सीमाओं पर पूर्ण नियंत्रण है और सेना युद्ध के लिए तैयार है।
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस संघर्ष को मध्य पूर्व के अगले हजार साल के लिए निर्णायक पल बताया।
संघर्ष का कारण और वैश्विक चिंता
अमेरिका और इज़राइल का मानना है कि ईरान का सैन्य और परमाणु कार्यक्रम क्षेत्रीय खतरा बढ़ा रहा है। ईरान इसे अपने स्वतंत्रता और सुरक्षा का बचाव बता रहा है। संघर्ष ने मध्य पूर्व के सहयोगी देशों और वैश्विक ऊर्जा नेटवर्क को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।