ईरान के खिलाफ जारी क्षेत्रीय तनाव के बीच इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में मौजूद ईरानी-कुर्द संगठन ने संकेत दिया है कि उसके लड़ाके ईरान के अंदर ज़मीनी अभियान शुरू कर सकते हैं। संगठन के नेता ने यह भी पुष्टि की है कि इस संबंध में अमेरिका ने उनसे संपर्क किया है।
इराक में स्थित ख़बात ऑर्गनाइजेशन ऑफ ईरानी कुर्दिस्तान के महासचिव बाबाशेख हुसैनी ने अल जज़ीरा से कहा कि हालात पहले की तुलना में अधिक अनुकूल हो गए हैं और ईरान में ज़मीनी कार्रवाई की संभावना “काफी अधिक” है।
हुसैनी ने कहा कि अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन संगठन लंबे समय से इस तरह की योजना पर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने विभिन्न माध्यमों से उनके संगठन से संपर्क किया है, हालांकि अब तक कोई सीधी मुलाकात नहीं हुई है।
इस घटनाक्रम के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शनिवार को दावा किया कि उसने इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में “अलगाववादी समूहों” के तीन ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि यदि कुर्द लड़ाकों ने ईरान की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ कोई कदम उठाया, तो उन्हें कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
उधर इराकी सरकार ने भी स्थिति को लेकर चिंता जताई है। इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी और कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिरवान बरजानी ने फोन पर बातचीत में कहा कि इराक की भूमि का इस्तेमाल किसी पड़ोसी देश के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होने दिया जाएगा।
तेहरान ने भी चेतावनी दी है कि यदि निर्वासित ईरानी-कुर्द लड़ाकों को ईरान में प्रवेश करने दिया गया तो वह कुर्दिस्तान क्षेत्र की सुविधाओं को निशाना बना सकता है।
इस बीच रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि इज़राइल पश्चिमी ईरान के कुछ हिस्सों में बमबारी कर रहा है ताकि ईरानी-कुर्द लड़ाकों को समर्थन मिल सके।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि यदि कुर्द लड़ाके ईरान की सीमा पार करते हैं तो यह “अच्छी बात” होगी।
तनाव के बीच इराक में भी कई सुरक्षा घटनाएँ सामने आई हैं। बगदाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन और मिसाइल हमले की खबरें हैं, जबकि उत्तरी शहर एरबिल के ऊपर कई ड्रोन मार गिराए गए। दक्षिणी प्रांत बसरा में एक तेल परिसर पर भी ड्रोन हमला हुआ है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र से ईरान के अंदर ज़मीनी घुसपैठ होती है, तो इससे मौजूदा संघर्ष और व्यापक हो सकता है तथा पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।