अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैलता दिखाई दे रहा है। युद्ध के दूसरे सप्ताह में ईरान की जवाबी कार्रवाई सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, जॉर्डन और इराक तक पहुंच गई है। मिसाइलों और ड्रोन हमलों के कारण कई देशों में वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय हो गई, हवाई यातायात प्रभावित हुआ और तेल प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं।
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने शनिवार को कहा कि ईरान अब पड़ोसी देशों को तब तक निशाना नहीं बनाएगा, जब तक उनके क्षेत्र से ईरान पर हमला नहीं किया जाता। उन्होंने हाल के दिनों में हुए हमलों के लिए क्षेत्रीय देशों से खेद भी व्यक्त किया।
सऊदी अरब और कतर में मिसाइल हमले नाकाम
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अल-खर्ज स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को वायु रक्षा प्रणाली ने हवा में ही नष्ट कर दिया। इसके अलावा शैबा तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे छह ड्रोन भी मार गिराए गए। राजधानी रियाद के पूर्वी हिस्से में भी एक ड्रोन को इंटरसेप्ट किए जाने की सूचना है।
कतर के रक्षा मंत्रालय ने भी शनिवार को एक मिसाइल हमले को रोकने की पुष्टि की। इससे एक दिन पहले ईरान से दागे गए दस ड्रोन में से नौ को कतर की वायु रक्षा प्रणाली ने मार गिराया था, जबकि एक ड्रोन दूरस्थ क्षेत्र में गिरा।
संयुक्त अरब अमीरात में भी हवाई रक्षा प्रणाली को सक्रिय करना पड़ा। अधिकारियों के अनुसार मिसाइलों और ड्रोन को रोकने के दौरान हुए इंटरसेप्शन के मलबे से दुबई में एक मामूली घटना हुई।
दुबई एयरपोर्ट पर उड़ानें प्रभावित
दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे पर एक ड्रोन गिरने की घटना के बाद कुछ समय के लिए सभी उड़ानों को रोक दिया गया। विमान निगरानी सेवा Flightradar24 के अनुसार कई विमान हवाई अड्डे के ऊपर होल्डिंग पैटर्न में चक्कर लगाते दिखाई दिए।
बाद में सीमित क्षमता के साथ उड़ानों का संचालन आंशिक रूप से बहाल किया गया। कतर में भी हवाई क्षेत्र को सीमित रूप से खोला गया है और फिलहाल केवल चुनिंदा उड़ानों को अनुमति दी जा रही है।
बहरीन और जॉर्डन में अलर्ट
बहरीन में सुरक्षा सायरन बजने के बाद नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। कुछ घंटों के भीतर यह दूसरी बार था जब चेतावनी सायरन बजाए गए।
जॉर्डन के अक़ाबा शहर के ऊपर भी एक मिसाइल को इंटरसेप्ट किया गया। यह शहर इज़राइल के दक्षिणी शहर इलात के सामने स्थित है, जिसे युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान लगातार निशाना बना रहा है।
जॉर्डन में अमेरिकी THAAD प्रणाली को निशाना बनाने का दावा
क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान ने जॉर्डन में तैनात अमेरिकी Terminal High Altitude Area Defense (THAAD) मिसाइल रक्षा प्रणाली के रडार को निशाना बनाया है। बताया जा रहा है कि इस हमले में रडार प्रणाली को नुकसान पहुंचा है।
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के उन्नत रडार की कीमत लगभग 500 मिलियन डॉलर तक हो सकती है और यह लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बसरा में तेल प्रतिष्ठान पर ड्रोन हमला
इराक के दक्षिणी बसरा प्रांत में विदेशी कंपनियों के एक तेल परिसर पर ड्रोन हमले से भीषण आग लगने की खबर है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी कंपनियों Halliburton और KBR के कार्यालय और गोदाम इस घटना से प्रभावित हुए हैं।
बसरा क्षेत्र विदेशी ऊर्जा कंपनियों की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
अमेरिकी ठिकानों पर भी निशाना
ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने संयुक्त अरब अमीरात के अल-धफरा एयरबेस पर ड्रोन हमला करने का दावा किया है। रिपोर्टों में कहा गया है कि वहां अमेरिकी सैटेलाइट संचार केंद्र और प्रारंभिक चेतावनी रडार को निशाना बनाया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
“समर्पण का सपना दफन कर दें”: ईरान
अपने संबोधन में राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल के हमलों में ईरान के 170 से अधिक शहर प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन हमलों में रिहायशी इलाके, स्कूल और अस्पताल भी निशाना बने हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की “बिना शर्त समर्पण” की मांग को खारिज करते हुए कहा कि ईरान ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा।
ऊर्जा बाजार पर संकट की आशंका
कतर के ऊर्जा मंत्री Saad al-Kaabi ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध कई सप्ताह तक जारी रहा तो खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात प्रभावित हो सकता है। इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज वृद्धि और आपूर्ति संकट पैदा होने की आशंका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संघर्ष इसी तरह बढ़ता रहा तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।