मध्य प्रदेश के जबलपुर में क्रिसमस से ठीक पहले एक चर्च परिसर में हुए हंगामे ने सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। आरोप है कि धर्मांतरण के शक में पहुंचे हिंदू दक्षिणपंथी संगठनों के सदस्यों और भाजपा की एक स्थानीय पदाधिकारी ने चर्च के अंदर मौजूद एक नेत्रहीन महिला के साथ अभद्र व्यवहार किया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
यह घटना हावाबाग महिला कॉलेज के पीछे स्थित चर्च की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, भाजपा की जिला उपाध्यक्ष अंजू भार्गव कुछ संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ चर्च पहुंचीं और वहां नेत्रहीन बच्चों के जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाया। इसी दौरान चर्च के अंदर विवाद शुरू हो गया।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक नेत्रहीन महिला चर्च में बैठी हुई है और भाजपा नेत्री उससे तीखी बहस कर रही हैं। वीडियो में महिला को छूने और उसका चेहरा पकड़ने जैसे दृश्य भी दिखाई दे रहे हैं, जिस पर नेत्रहीन महिला विरोध जताते हुए बार-बार हाथ हटाने को कहती है। स्थिति बिगड़ती देख वहां मौजूद अन्य लोग बीच में आते हैं और बाद में पुलिस मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप करती है।
पुलिस के अनुसार, चर्च में नेत्रहीन छात्रों को क्रिसमस के मौके पर आयोजित एक सामूहिक भोज के लिए आमंत्रित किया गया था। ये छात्र एक सरकारी छात्रावास से लाए गए थे। छात्रों ने पुलिस को बताया कि उन्हें किसी भी तरह के धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं किया गया और कार्यक्रम केवल भोजन व प्रार्थना तक सीमित था।
पुलिस ने प्रारंभिक जांच में जबरन धर्मांतरण के आरोपों से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिला है कि बच्चों पर धर्म बदलने का दबाव डाला गया हो। हंगामे के बाद सभी छात्रों को सुरक्षित रूप से वापस छात्रावास भेज दिया गया।
वहीं, हिंदू दक्षिणपंथी संगठनों ने प्रशासन से शिकायत कर सवाल उठाए हैं कि सरकारी छात्रावास के बच्चों को बिना अनुमति धार्मिक स्थल पर कैसे ले जाया गया। उनका आरोप है कि कार्यक्रम में केवल ईसाई धार्मिक गतिविधियां कराई गईं और भोजन को लेकर भी आपत्ति जताई गई है।
घटना के बाद प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं, खासकर पुलिस की मौजूदगी और शुरुआती प्रतिक्रिया को लेकर। फिलहाल मामले की जांच जारी है और वायरल वीडियो के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है।
