झारखंड में SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले इमारत-ए-शरीया बिहार, ओडिशा और झारखंड ने व्यापक और संगठित प्रशिक्षण अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य राज्य के सभी ज़िलों में नागरिकों को SIR, पैरेंटल मैपिंग, और वोटर फॉर्म-6, 7 और 8 से संबंधित व्यावहारिक जानकारी देना है, ताकि कोई भी नागरिक इस प्रक्रिया से वंचित न रहे।
केंद्रीय दारुल क़ज़ा इमारत-ए-शरीया के क़ाज़ी मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद अनज़ार आलम क़ासमी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया कि मौलाना अहमद वली फ़ैसल रहमानी, अमीर-ए-शरीअत बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान सरकार ने बिना वास्तविक आवश्यकता SIR लागू किया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में वोटर आईडी और नागरिकता को जोड़ने की संभावना है और मामूली गलती पर भी नागरिकता पर सवाल उठ सकते हैं। इसलिए SIR की प्रक्रिया शुरू होने से पहले जनता को पूरी तरह जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है।
इमारत-ए-शरीया ने चार सदस्यों की एक टीम गठित की है, जो डेढ़ महीने तक राज्य के सभी ज़िलों में युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण देगी। प्रशिक्षण में युवाओं को SIR प्रक्रिया में फॉर्म भरने, पैरेंटल मैपिंग समझाने और वोटर सूची सुनिश्चित करने की जानकारी दी जाएगी।
सहायक सचिव मौलाना अहमद हुसैन क़ासमी मदनी ने कहा कि इस प्रशिक्षण अभियान का दायरा पूरी तरह समावेशी होगा। इसमें आदिवासी समुदाय जैसे संथाली, उरांव, हो, मुंडा और खड़िया को भी शामिल किया जाएगा। राज्य के प्रत्येक प्रखंड में प्रोजेक्टर और तैयार सामग्री के माध्यम से विशेष कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँगी। युवाओं को केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें मैदान-ए-अमल में जनता की मदद करने और SIR के विभिन्न चरणों में सही प्रक्रिया अपनाने की व्यावहारिक क्षमता भी विकसित की जाएगी।
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में विभिन्न मिल्ली जमाअतों और सामाजिक संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित थे, जिनमें हाजी शाह उमैर (जनरल सेक्रेटरी, जमीअत ए उलमा [मीम]), मौलाना शफ़ीक़ आलियावी (ज़िम्मेदार, जमीअत अहले-हदीस), जनाब मुख़्तार अहमद (अध्यक्ष, अंजुमन-ए-इस्लामिया रांची), डॉ. तारिक़ हुसैन (सचिव, अंजुमन-ए-इस्लामिया रांची), मौलाना साबिर हुसैन मज़ाहिरी (अध्यक्ष, मजलिस-ए-उलमा झारखंड), जनाब प्रफुल लिंडा और जनाब रतन तिर्गी (सामाजिक व आदिवासी एक्टिविस्ट) शामिल थे।
सभी प्रतिनिधियों ने इस प्रशिक्षण अभियान को समयोचित, आवश्यक और जनहित से जुड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल पूरी तरह सुधारात्मक और निस्वार्थ नागरिक सेवा पर आधारित है, और इसका किसी राजनीतिक दल या हित से कोई संबंध नहीं है। इसका उद्देश्य केवल नागरिकों को उनके संवैधानिक और सामाजिक अधिकारों से अवगत कराना और उनके संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना है।
अख़बार के सूत्रों के अनुसार, इमारत-ए-शरीया और विभिन्न मिल्ली जमाअतों ने राज्य की जनता, विशेषकर युवाओं, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे इस प्रशिक्षण अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें, धर्म और जाति से परे एक-दूसरे के कार्यों में सहयोग करें और इसे सफल बनाने में अपना पूरा योगदान दें।
प्रत्याशा जताई जा रही है कि इस प्रशिक्षण अभियान के बाद झारखंड में कोई भी नागरिक SIR प्रक्रिया से वंचित नहीं रहेगा और वोटर लिस्ट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों में शामिल होने के अपने संवैधानिक अधिकारों का पूरा लाभ उठा सकेगा।
