कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन Popular Front of India (PFI) के सदस्य शाहिद खान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। शाहिद खान उन 19 आरोपितों में शामिल हैं, जिन पर कथित रूप से मुस्लिम युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए प्रेरित करने, उन्हें सशस्त्र प्रशिक्षण देने और आतंकवादी कार्यों के लिए धन जुटाने के आरोप हैं। यह फैसला क्रिमिनल अपील संख्या 1475/2025 (SHAHID KHAN v/s STATE OF KARNATAKA) में सुनाया गया।
अभियोजन का कहना है कि शाहिद खान 2019 से दावणगेरे ज़ोन के जिला अध्यक्ष के रूप में PFI की गतिविधियों में सक्रिय थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने संगठन के माध्यम से युवाओं को कथित रूप से आतंकवादी गतिविधियों के लिए प्रेरित किया और ऐसे समूह तैयार किए, जो हिंसक कृत्यों में शामिल हो सकते थे।
शाहिद खान पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153A और 120B के साथ-साथ UAPA की धारा 13, 17, 18, 18A, 18B और 22B के तहत भी आरोप हैं।
शाहिद खान को 22 सितंबर 2022 को गिरफ्तार किया गया था। निचली अदालत ने पहले ही उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
डिवीजन बेंच के न्यायमूर्ति एच.पी. सन्देश और न्यायमूर्ति वेंकटेश नाइक टी ने कहा कि निचली अदालत ने उपलब्ध सबूतों का समुचित मूल्यांकन किया और जमानत देने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत पर रोक कानूनन बाध्यकारी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 45 के अनुसार सरकार की स्वीकृति केवल अपराध के संज्ञान के लिए आवश्यक है, किसी विशेष आरोपी के लिए नहीं। इसलिए मुकदमा जारी रह सकता है।
कोर्ट ने जमानत न देने के मुख्य कारण बताये
शाहिद खान के कथित आतंकवादी वित्त पोषण और धन जुटाने में शामिल होने के स्पष्ट सबूत।
सबूतों का परीक्षण ट्रायल में किया जाएगा; इसे जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता।
मामूली प्रक्रियात्मक चूक (जैसे जब्ती में नियम का पालन न होना) जमानत का कारण नहीं बन सकती।
केस डायरी आरोपी को उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।
अदालत के आदेश के बाद शाहिद खान जमानत पर रिहा नहीं होंगे। NIA और राज्य पक्ष ट्रायल में सबूतों के साथ मुकदमे को आगे बढ़ाएंगे।
