
इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) ने यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, मेघालय (USTM) के चांसलर महबूबुल हक़ की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। असम पुलिस ने उन्हें शुक्रवार को श्रीभूमि जिले के पाथरकांडी इलाके में केंद्रीय पब्लिक स्कूल में सीबीएसई कक्षा 12वीं की भौतिकी परीक्षा के दौरान हुई कथित “कानून और व्यवस्था” की स्थिति के आरोप में गिरफ्तार किया।
महबूबुल हक़, जो यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, मेघालय (USTM) और इसे संचालित करने वाली एजुकेशन एंड रिसर्च डेवलपमेंट (ERD) के संस्थापक हैं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के निशाने पर रहे हैं। भाजपा के कट्टर मुस्लिम विरोधी नेताओं में से एक सरमा ने हक़ पर ‘बाढ़ जिहाद’ का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि मेघालय के री-भोई जिले में स्थित USTM परिसर में निर्माण कार्य और वनों की कटाई के कारण गुवाहाटी में बाढ़ आई।
एसडीपीआई ने हक़ की गिरफ्तारी को संघ परिवार की मुस्लिम विरोधी एजेंडा का हिस्सा करार दिया है और इसे हक़ द्वारा समाज, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के लिए किए जा रहे शैक्षणिक कार्यों को खत्म करने का प्रयास बताया है। पार्टी ने असम सरकार द्वारा लगाए गए झूठे आरोपों के तहत गिरफ्तार किए गए महबूबुल हक़ की तुरंत और बिना शर्त रिहाई की मांग की है।
एसडीपीआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एडवोकेट शरफुद्दीन अहमद ने बयान जारी कर कहा कि यह गिरफ्तारी असम सरकार की मनमानी और शिक्षा विरोधी मानसिकता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि सरकार को हक़ के खिलाफ झूठे आरोपों को खत्म कर उन्हें रिहा करना चाहिए।
यह मामला असम सरकार की अल्पसंख्यक विरोधी नीतियों को उजागर करता है और बताता है कि किस तरह से मुस्लिम शिक्षाविदों और संस्थानों को निशाना बनाया जा रहा है।