इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
मौलाना आज़ाद नेशनल फ़ेलोशिप (MANF) पाने वाले शोधार्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने संसद में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाक़ात कर अपनी समस्याएं साझा कीं। मुलाक़ात के बाद राहुल गांधी ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू को पत्र लिखकर फ़ेलोशिप से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई की मांग की।
राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि
“2022-23 से MANF बंद होने के कारण अल्पसंख्यक समुदायों के सैकड़ों शोधार्थियों की पढ़ाई और शोध कार्य ठप पड़ गया है। सरकार ने मौजूदा स्कॉलर्स को फ़ेलोशिप जारी रखने का आश्वासन दिया था, लेकिन हक़ीक़त यह है कि उन्हें 7-7 महीने तक भुगतान में देरी हो रही है। इसके अलावा, उन्हें अन्य फ़ेलोशिप की तरह संशोधित हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी नहीं दिया जा रहा है।”
उन्होंने मांग की कि “नए छात्रों के लिए MANF को तत्काल बहाल किया जाए और मौजूदा स्कॉलर्स को हर महीने समय पर भुगतान मिले, जैसा कि अन्य फ़ेलोशिप धारकों को मिलता है।”
इस पूरी पहल में एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी की अहम भूमिका रही। उनके प्रयासों से राहुल गांधी और छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच लगातार मुलाक़ातें संभव हो पाईं और MANF बहाली की आवाज़ संसद के भीतर तक पहुँची।
राहुल गांधी ने पत्र में लिखा, “यह बेहद ज़रूरी है कि अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र भी भारत की अकादमिक और वैज्ञानिक प्रगति में अपना पूरा योगदान दे सकें।”
