सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मोहम्मद शफी ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को राउज एवेन्यू न्यायालय द्वारा बरी किए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए इसे “राजनीतिक रूप से प्रेरित मुकदमे पर न्यायिक प्रहार” करार दिया है।
जारी बयान में मोहम्मद शफी ने कहा कि न्यायिक परीक्षण के दौरान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का मामला पूरी तरह कमजोर साबित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन दावों को बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया था, वे अदालत की कसौटी पर टिक नहीं सके। कथित कमीशनखोरी और नीति में हेरफेर से जुड़े आरोपों के समर्थन में ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके।
उन्होंने कहा कि अदालत का निर्णय यह दर्शाता है कि मामले को तथ्यात्मक जांच की बजाय राजनीतिक कथा के सहारे आगे बढ़ाया गया। “यह फैसला केवल दो नेताओं को मिली राहत नहीं है, बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के बढ़ते दुरुपयोग पर गंभीर प्रश्नचिह्न भी लगाता है,” उन्होंने कहा।
एसडीपीआई नेता ने आरोप लगाया कि जिन संस्थानों से स्वतंत्र और निष्पक्ष कार्यप्रणाली की अपेक्षा की जाती है, वे राजनीतिक दबाव और विरोधियों को डराने-धमकाने के औजार में तब्दील होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी, लंबी अवधि तक कारावास और सार्वजनिक बदनामी के बाद भी दोष सिद्ध न कर पाना एक चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है।
मोहम्मद शफी ने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करती है और असहमति की आवाजों को दबाने का वातावरण तैयार करती है। उन्होंने न्यायालय के फैसले को न्यायपालिका की स्वतंत्रता में विश्वास को मजबूत करने वाला बताया, साथ ही यह भी कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को क्षति पहुंचाने वालों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने अंत में कहा कि संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और लोकतांत्रिक ढांचे को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए सभी लोकतांत्रिक शक्तियों को एकजुट होकर प्रयास करना होगा।