बिहार के सुपौल जिले के बीरपुर थाना क्षेत्र के शंकरपुर गांव के मजदूर नूरशीद आलम के साथ बिहार के ही मधुबनी जिले के राजनगर थाना क्षेत्र के नंदी चकरा गांव में मॉब लिंचिंग की कोशिश की गई। पीड़ित वहां मजदूरी के लिए गया था।
नूरशीद आलम ने बताया कि, “मैं एक दुकान पर सामान लेने गया था। तभी एक युवक आया और बोला कि ‘भारत माता की जय’ और ‘जय श्री राम’ बोलो। मैंने कहा कि हम ‘जय भारत’ बोल सकते हैं लेकिन ‘जय श्री राम’ नहीं। एक घंटे बाद वही युवक धमकाते हुए वापस आया और जबरदस्ती कहने के लिए मजबूर किया। मैंने मजबूरी में बोल दिया।”
पीड़ित ने आगे बताया, “कल हो कर काम पर गया और दोपहर में लंच के लिए बाहर गया। वापसी में दुकान के सामने 2-3 लोग खड़े थे। उन्होंने मुझे पकड़ लिया और कहा कि मैं बांग्लादेशी हूँ। इसके बाद मुझे 3 किलोमीटर तक घसीटते हुए पीटा। मेरे नाक-मूंह से खून बह रहा था, लेकिन कोई मदद नहीं की। भीड़ ने धमकी दी कि मुझे काली मंदिर में चढ़ा देंगे और जिंदा गाड़ देंगे। वहां लगभग 50 लोग जमा थे और देर तक लात-घूसों से हमला करते रहे।”
पीड़ित के गांव वालों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। थानेदार ने कहा, “चोट लगी है, हम जांच कर रहे हैं। दुकानदार से भी पूछताछ हो रही है।” पीड़ित शुरू में मुकदमा दर्ज करने में हिचकिचा रहे थे, लेकिन पुलिस की सलाह पर उन्होंने आवेदन दिया और एफआईआर दर्ज कर ली गई।
इस घटना के बाद पीड़ित के गांव के अन्य मजदूर भी डर के कारण काम छोड़कर अपने गांव लौट गए, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक तनाव और डर का माहौल पैदा करती हैं और मजदूरों की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डालती हैं।
