महाराष्ट्र के नागपुर‑अमरावती जिले में मंगलवार रात को क्रिसमस प्रार्थना सभा के दौरान केरल के मलेयाली ईसाई पादरी फादर सुधीर और उनकी पत्नी जैस्मीन को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इस कार्रवाई के पीछे धार्मिक परिवर्तन के प्रयास का आरोप बताया। साथ ही, पूछताछ के लिए अन्य चार लोग भी हिरासत में लिए गए, जिससे कुल आरोपी संख्या 12 हो गई।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तारियां स्थानीय शिंकोरी गाँव में आयोजित क्रिसमस प्रार्थना सभा के दौरान हुईं। आरोप है कि सभा में कुछ लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रलोभन दिया गया। सभी आरोपियों को बाद में सशर्त जमानत मिली है।
केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन ने इस गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे “बहुत ही परेशान करने वाला” करार देते हुए कहा कि यह धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ एक चिंताजनक पैटर्न का हिस्सा है। उन्होंने चेताया कि ऐसी कार्रवाइयां समाज में ध्रुवीकरण बढ़ाती हैं और संवैधानिक स्वतंत्रताओं को कमजोर करती हैं।
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतैशान ने प्रधानमंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गिरफ्तारी रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता सभी को प्राप्त है और शांतिपूर्ण प्रार्थना सभा के लिए किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए।
CSI बिशप्स काउंसिल ने भी गिरफ्तारी की निंदा की और फादर सुधीर को पूर्ण कानूनी समर्थन देने की घोषणा की। बिशप सैबू कोशी चेरियन ने बताया कि फादर सुधीर लगभग 12 वर्षों से नागपुर में बच्चों की शिक्षा और स्थानीय समुदायों के विकास के लिए काम कर रहे हैं।
इस घटना ने देश में धार्मिक स्वतंत्रता, एंटी‑कन्वर्ज़न कानूनों के दुरुपयोग और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण पर नई बहस को जन्म दिया है। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने महाराष्ट्र सरकार से आरोपों की निष्पक्ष जांच और संविधान की रक्षा करने की अपील की है।
