जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने जम्मू को अलग राज्य बनाए जाने की बीजेपी नेताओं की मांग को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे जम्मू-कश्मीर की एकता के खिलाफ बताते हुए कहा कि बीजेपी पहले ही लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाकर वहां के हालात बिगाड़ चुकी है और अब वही गलती जम्मू में दोहराने की कोशिश हो रही है।
मंगलवार को जम्मू में मीडिया से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि 2019 में किए गए फैसलों का खामियाजा आज लद्दाख की जनता भुगत रही है।
उन्होंने कहा, “लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाकर बीजेपी ने वहां के लोगों की आवाज़ छीन ली। आज चार साल से ज्यादा समय से लोग सड़कों पर हैं। अगर अब यही मॉडल जम्मू पर थोपने की तैयारी है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”
मुख्यमंत्री का यह बयान बीजेपी विधायक श्याम लाल शर्मा के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कथित भेदभाव का हवाला देते हुए जम्मू के लिए अलग राज्य की मांग उठाई थी। उमर अब्दुल्लाह ने सवाल किया कि जब केंद्र में बीजेपी की सरकार थी और 2019 में पूरा पुनर्गठन किया गया, तब यह मांग क्यों नहीं उठाई गई।
उन्होंने आगे कहा कि जम्मू की जनता को बांटने की राजनीति से कोई फायदा नहीं होगा। “बीजेपी की नीतियां न लद्दाख में चलीं, न जम्मू-कश्मीर में। अब वे नए मुद्दे खड़े कर अपनी नाकामी छुपाना चाहते हैं”
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने भी जम्मू को अलग राज्य बनाने की मांग का विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि पीर पंजाल और चिनाब घाटी के लोगों ने कभी अलग जम्मू राज्य की मांग नहीं की और वे एकजुट जम्मू-कश्मीर के विचार के साथ खड़े हैं।
इस बीच उमर अब्दुल्लाह ने दोहराया कि उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्यहुड दिलाना है। उन्होंने कहा कि 2026 में सरकार का फोकस राज्यहुड की बहाली, विधानसभा के बजट सत्र और पर्यटन सीजन की तैयारियों पर रहेगा।
बीजेपी की ओर से अब तक इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस बयानबाज़ी ने एक बार फिर 2019 के बाद बने हालात और जम्मू-कश्मीर के भविष्य को लेकर सियासी बहस को तेज कर दिया है।
