वेनेजुएला पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में किए गए आपराधिक युद्ध और राजधानी काराकस में क्रूर बमबारी के खिलाफ आज पटना में AIPF (अखिल भारतीय प्रगतिशील फ़ोरम) के बैनर तले एक जोरदार विरोध सभा आयोजित की गई। सभा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और ‘वेनेजुएला की जनता के साथ अटूट एकजुटता’, ‘वेनेजुएला से दूर हटो’ और ‘अमेरिकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद’ के नारों से विरोध स्थल गूंज उठा।
सभा का संचालन AIPF के संयोजक कमलेश शर्मा ने किया। विरोध सभा में खेग्राम्स के महासचिव धीरेंद्र झा, सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल कृष्ण, एमएलसी शशि यादव, किसान नेता शंभू नाथ मेहता, कुमार परवेज, दिव्या गौतम, AISA नेता सबा आफरीन और पूर्व विधायक गोपाल रविदास ने संबोधन दिया।
वक्ताओं ने कहा कि अमेरिका का यह हमला केवल वेनेजुएला के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह उन सभी देशों और लोगों के लिए चेतावनी है जो साम्राज्यवादी शक्तियों से स्वतंत्र रूप से अपना भविष्य तय करना चाहते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जिस तरह इराक पर झूठे बहानों के तहत आक्रमण किया गया था, वही रणनीति आज वेनेजुएला के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ दोहराई जा रही है।
उन्होंने बताया कि दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश वेनेजुएला की लूट को जायज़ ठहराने के लिए अमेरिकी प्रशासन द्वारा “नारको-आतंकवाद” का बहाना इस्तेमाल किया जा रहा है। यह युद्ध अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों की सेवा के लिए, वेनेजुएला के तेल पर कब्ज़ा करने और वहां कठपुतली सरकार स्थापित करने के प्रयास का हिस्सा है।
सभा में यह भी चिंता व्यक्त की गई कि भारत सरकार ने अब तक इस आपराधिक घटना की निंदा नहीं की है। वक्ताओं ने मांग की कि भारत सरकार तुरंत इस अमेरिकी आक्रमण की निंदा करे और वेनेजुएला की संप्रभुता के समर्थन में स्पष्ट रुख अपनाए।
कार्यक्रम में भाकपा–माले के वरिष्ठ नेता के. डी. यादव, किसान सभा के नेता उमेश सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता पंकज श्वेताभ, सुनील कुमार, पटना नगर सचिव जितेंद्र कुमार, शहजादे आलम, डॉ. प्रकाश कुमार, आफ्शा जबीं, पुनीत पाठक, आशुतोष कुमार, प्रमोद यादव, मुर्तजा अली, अनय मेहता, राखी मेहता, संजय कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि अमेरिका का यह हमला लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र में उसके हस्तक्षेप और सत्ता अधिग्रहण के लंबे इतिहास का नया अध्याय है। उन्होंने बताया कि ग्वाटेमाला से चिली, ग्रेनाडा से पनामा तक, मोनरो सिद्धांत के माध्यम से अमेरिकी साम्राज्य ने हमेशा इस क्षेत्र के देशों को उनकी संप्रभुता और आत्मनिर्णय के अधिकार से वंचित किया है।
सभा में आह्वान किया गया कि दुनिया भर की सभी लोकतांत्रिक और शांतिप्रिय ताकतें इस साम्राज्यवादी आक्रमण और औपनिवेशिक अधीनता के प्रयासों के खिलाफ एकजुट हों।
अंत में, सभी उपस्थित लोगों ने पोस्टर और तख्तियां लेकर वेनेजुएला के प्रति अपनी एकजुटता जताई और अमेरिकी हस्तक्षेप को पूरी तरह नकारा।
