प्रशांत किशोर और ललन सिंह का मुसलमानों पर वोट न देने का आरोप बेबुनियाद

✍️ अब्दुल रकीब नोमानी

बिहार विधानसभा उपचुनाव के परिणाम पिछले शनिवार को ही आ चुके हैं। जिसमें से सभी चारों सीटों पर एनडीए घटक दल के उम्मीदवार चुनाव जीतने में कामयाब रहे। इसमें से तीन विधानसभा सीट ऐसी थी जिनपर पहले महागठबंधन का कब्जा था, बाकी एक सीट एनडीए घटक दल हिंदुस्तानिक आवाम मोर्चा के पास थी। ये सभी सीट वहाँ के विधायकों के सांसद बनने के बाद रिक्त हुई थी। इस विधानसभा उपचुनाव में पहली बार प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने भी सभी सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। हालांकि उन्हें सभी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। परिणामों के बाद प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजद को दो सीट पर नुकसान करने के सवालों पर जवाब देते हुए कहा कि ये बिल्कुल बकवास है। उन्होंने आगे कहा कि मेरे भाई आप बेलागंज का बूथ वाईज वोट निकाल कर देख लीजिए। वहां के मुसलमानों ने जदयू-भाजपा को वोट दिया है और आपके माध्यम से बिल्कुल क्लियर कर देना चाहता हूं बेलागंज के मुसलमानों ने जनसुराज को वोट नहीं दिया है। बेलागंज विधानसभा सीट पर जनसुराज ने मुस्लिम चेहरे मोहम्मद अमजद को अपना उम्मीदवार बनाया था। जो पूर्व में भी विधायकी के चुनाव लड़ते रहे हैं। जिसपर प्रशांत किशोर का सबसे ज्यादा फ़ोकस था। प्रशांत किशोर को चारों सीट में सबसे ज्यादा उम्मीद बेलागंज विधानसभा सीट से ही थी। जहां पर उन्होंने सबसे ज्यादा सभाएँ भी की थी। लेकिन परिणाम उम्मीदों के ठीक विपरित रही।

वहीं, दूसरी ओर जदयू के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज में आयोजित पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक यानी मुसलामान पहले भी जदयू को वोट नहीं देते थे और ना ही अब देते हैं। तो इस मुगालते में मत रहिए। जबकि नीतीश कुमार सभी का विकास करते हैं।

हम इस आर्टिकल के जरिए समझने की कोशिश करेंगे करेंगे कि दोनों नेताओं के दावों में कितनी सच्चाई है?

प्रशांत किशोर ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ख़ासकर बेलागंज विधानसभा के बारे में जिक्र किया है कि यहाँ के मुसलमानों ने जनसुराज को अपना वोट नहीं दिया है। दूसरी ओर ललन सिंह ने इसी उपचुनाव परिणाम के बाद सभाओं में कहा कि उनके पार्टी जदयू को मुसलमानों का वोट नहीं मिलता है। इसलिए हम बेलागंज विधानसभा के मुस्लिम बहुल बूथ के आँकड़ों के जरिए समझने की कोशिश करेंगे कि दोनों के बयान सही हैं या ग़लत? इनके दावों में कितनी सच्चाई है?
अपने विश्लेषण में हम इनके लिए बेलागंज के 75 मुस्लिम बहुल बूथ के आँकड़ों के जरिए इनको समझेंगे। इनमें हम चार पार्टियों को मिलने वाले वोटों को इसमें शामिल करेंगे कि कौन से पार्टी को कितना वोट मिला है? इनमें प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज, नीतीश कुमार की जदयू, लालू प्रसाद यादव की राजद और असदुद्दीन ओवसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन को शामिल करेंगे। जिनसे समझने में आसानी होगी कि मुसलमानों का वोट किनको कितना और किनको अधिक गया है?
ताकि दावों की हक़ीक़त को सही से पता लगाया जा सके।

प्रशांत किशोर के दावे और सच्चाई?
बेलागंज विधानसभा के बेल्हाडी गांव के बूथ नंबर – 29 पर जनसुराज को चारों पार्टी में से सबसे ज्यादा वोट मिले। यहाँ पर जनसुराज को 231 वोट, जदयू को 37,आरजेडी को 141 वोट और मजलिस को 11 वोट मिले हैं। चांद वाजितपुर गांव के बूथ नंबर – 37 पर जनसुराज को 216 वोट, जदयू को 307,आरजेडी को 141 और मजलिस को 23 वोट मिले हैं। इसी गाँव के बूथ नंबर 38 पर जनसुराज को 204 वोट, जदयू को 217 वोट ,आरजेडी को 152 और मजलिस को 50 वोट मिले हैं। जादोपुर गांव के बूथ नंबर – 41 पर जनसुराज को 192 वोट, जदयू को 329,आरजेडी को 131 और मजलिस को 13 वोट मिले हैं। अल्वालपुर गांव के बूथ नंबर – 42 पर जनसुराज को 231 वोट, जदयू को 131,आरजेडी को 179 और मजलिस को 10 वोट मिले हैं। अशरफपुर गांव के बूथ नंबर – 56 पर जनसुराज को 258 वोट, जदयू को 10,आरजेडी को 56 और मजलिस को 03 वोट मिले हैं।वही शम्सपुर गांव के बूथ नंबर – 57 पर जनसुराज को 258 वोट, जदयू को 30,आरजेडी को 32 और मजलिस को 02 वोट मिले हैं।
ऐसे ही 75 मुस्लिम बहुल बूथ में से जनसुराज पार्टी को 28 बूथों पर दूसरे पार्टियों के मुकाबले सबसे ज्यादा वोट मिले हैं। इनमें बेल्हाडी, अशरफपुर, शम्सपुर, बालापुर, भलुआ, कुरीसराय, चंदौती, नीमचक, आज़ादबीघा, लक्ष्मीपुर, रेवाडा, पीरबीघा, नसीरपुर, कसमा, बारा, और भीखचक जैसे गाँव के बूथ शामिल हैं। इनके अलावा 28 मुस्लिम बहुल बूथ ऐसे हैं जहां पर जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे हैं। इन सभी 75 मुस्लिम बहुल बूथ पर जनसुराज पार्टी को मिलाकर 12776 वोट मिले हैं। जबकि जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार को देखें तो पूरे बेलगंज विधानसभा में 17285 वोट मिले हैं। जबकि ये आंकड़े बता रहे हैं कि जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार को मुस्लिम बहुल बूथ पर ही ज्य़ादा वोट मिले हैं। जबकि दूसरे धार्मिक बहुल बूथ पर जनसुराज पार्टी को नहीं के बराबर वोट मिले हैं। जबकि सच्चाई ये है कि इनको मुस्लिम बहुल बूथ पर जितने वोट मिले हैं इतने वोट आरजेडी के उम्मीदवार को भी नहीं मिले हैं। जिनके बारे में कहा जाता है कि ये आरजेडी के कोर वोटर होते हैं। आरजेडी पार्टी मुस्लिम बहुल 75 बूथ में से सिर्फ 4 बूथ पर पहले स्थान पर रही है। जो कि जनसुराज पार्टी से बहुत ही कम है। आरजेडी को 75 मुस्लिम बहुल बूथ में कुल 7299 वोट मिले हैं। वही असदुद्दीन ओवेसी की पार्टी जिनके बारे में कहा जाता है कि ये मुसलमानों की पार्टी है, इनके उम्मीदवार 75 मुस्लिम बहुल बूथ में से से सिर्फ 5 बूथ पर पहले नंबर पर रहे। जिनको टोटल 2883 वोट मिले। जनसुराज पार्टी को मिलने वाले टोटल वोट बता रहे हैं कि बेलागंज के मुसलमानों ने एक बड़ी संख्या में जनसुराज पार्टी को वोट किया है। जो आरजेडी और एआईएमएम से कहीं बहुत ज्यादा है। ऐसे में जनसुराज पार्टी के संरक्षक प्रशांत किशोर का कहना की बेलागंज के मुसलमानों ने उनको वोट नहीं दिया है। ये पूरी तरह से बेबुनियाद और ग़लत है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेलागंज को लेकर प्रशांत किशोर दावे सही नहीं हैं।

ललन सिंह के दावों में कहाँ तक है सच्चाई?

जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने कहा कि उनके पार्टी जदयू को मुसलमानों का वोट नहीं मिलता है। जबकि इसी बेलागंज विधानसभा उपचुनाव परिणाम के आंकड़े बता रहे है कि मुसलमानों ने इस बार सबसे ज्यादा जदयू पार्टी को ही अपना वोट दिया है। विश्लेषण में शामिल 75 मुस्लिम बहुल बूथ में से जदयू के उम्मीदवार मनोरमा देवी 38 बूथ पर सबसे ज्यादा वोट लाने में कामयाब रही है। जिसमें चांद वाजितपुर, जादोपुर, शम्सपुर, चंदौती जैसे गाँव के बूथ शामिल हैं। इनके अलावा 22 ऐसे बूथ हैं जहां पर जदयू उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रही है। जहां इनको टोटल 13210 वोट मिले हैं। जो अन्य सभी पार्टियों से ज्यादा है। विश्लेषण में शामिल मुस्लिम बहुल बूथ के आंकड़े बता रहे हैं कि मुसलमानों ने इसबार सबसे ज्यादा वोट जदयू उम्मीदवार को दिए हैं। ऐसे में ललन सिंह का ये कहना की मुसलमानों का वोट जदयू को ना पहले मिलता था ना ही अब मिलता है, ये पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठे हैं। जिसको जदयू के एमएलसी और अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर खालिद अनवर ने भी सोशल मीडिया साइट्स पर इस बात को स्वीकारा है कि मुसलमानों ने भारी संख्या में बेलागंज में जदयू को वोट किया है।

जदयू को पहले भी मुसलमानों का वोट मिलता रहा है।

बिहार का मुसलमान इस उपचुनाव से पहले भी जदयू को वोट करते रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में जदयू ने मुस्लिम बहुल लोकसभा क्षेत्र किशनगंज से मुजाहिद आलम को अपना उम्मीदवार बनाया था जो 343158 वोट लाकर दूसरे नंबर पर रहे थे। जबकि इस सीट पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के उम्मीदवार अख्तरूल ईमान इस सीट पर तीसरे नंबर पर रहे। ये आंकड़े भी बताते हैं कि मुसलमानों का वोट जदयू को मिलता है। इनके अलावा भी 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू को अच्छी खासी वोट मिली थी, जिस चुनाव में जदयू 115 विधानसभा सीट अकेले जीतने में कामयाब रही थी। ये वो दौर था जब नीतीश कुमार गुजरात दंगों के वज़ह से नरेंद्र मोदी को बिहार में प्रचार करने नहीं आने देते थे। क्योंकि उनको लगता था कि इनके वज़ह से मुसलमानों की एक बड़ी वोट बैंक हमारे हाथों से चली जायेगी। वही 2013 में जब बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को गुजरात से दिल्ली लाने की कोशिश की तो नीतीश कुमार की जदयू ने बीजेपी से ख़ुद को अलग कर लिया था। ऐसे में नीतीश कुमार पूरी तरह से आश्वस्त थे कि स्वर्ण वोट बीजेपी के साथ छोड़ने से मुझे नहीं आयेगा। लेकिन ऐसे में हमें मुसलमानों का पूरा साथ मिलेगा। जिसके बाद 2015 के विधानसभा चुनाव को जदयू ने आरजेडी के साथ लड़ा था। ये वो दौर था जब बीजेपी अपने उरूज पर थी। लेकिन बीजेपी गठबंधन को बुरी हार का सामना करना पड़ा था। इसमें महागठबंधन 243 विधानसभा सीट में से 178 सीट जीतने में क़ामयाब रही थी। इसमें राजद 80, जदयू 71 और कॉंग्रेस 27 सीट पर जीत हासिल की थी। एनडीए गठबंधन के खाते में महज 58 सीटें आई थी। क्योंकि इनमें मुसलमानों का पूरा वोट महागठबंधन को गया था। जिसमें थोड़ा भी बिखराव देखने को नहीं मिला था। इसके बाद 2020 के विधानसभा चुनाव को जदयू ने बीजेपी के साथ लड़ा, फिर भी जदयू को मुस्लिम वोटरों का पूरा साथ मिला था। वही जदयू कोटे से मंत्री अशोक चौधरी के बयानों से भी इसको समझा जा सकता है कि जिन्होंने कहा कि ललन सिंह के बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, असल में वो कह रहे हैं कि नीतीश कुमार ने मुसलमानों के लिए जितना काम किया है हमें उस हिसाब से वोट नहीं मिलते हैं। ये हमारे दुःख हैं। लेकिन जब आप ललन सिंह के बयान को सुनेंगे तो वो कहते नज़र आ रहे हैं कि मुसलमानों का वोट ज़दयू को कभी मिलता ही नहीं है। ऐसे में ये आरोप ये पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठे हैं। दरअसल मुसलामानों का वोट जदयू को अभी के साथ पहले भी मिलता रहा है।

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