छत्तीसगढ के बस्तर के आदिवासी मानवाधिकार कार्यकर्ता और मूलवासी बचाओ मंच के अध्यक्ष रघु मिडियामी आज एक साल से एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की हिरासत में हैं। उन्हें 27 फरवरी 2025 को दंतेवाड़ा से गिरफ्तार किया गया था, तब वे मोटरसाइकिल दुर्घटना में लगी गंभीर चोटों से उबर रहे थे।
मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि रघु की गिरफ्तारी शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलनों को दबाने की कोशिश है। उनके ऊपर एनआईए केस के अलावा यूएपीए (अवैध गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम) के छह अतिरिक्त मामले भी दर्ज किए गए हैं। इन मामलों के चलते उनकी रिहाई मुश्किल होती जा रही है।
रघु मिडियामी, 25 वर्षीय आदिवासी युवा नेता, बस्तर में आदिवासी अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन के अग्रणी रहे हैं। मूलवासी बचाओ मंच के माध्यम से उन्होंने लगभग 30 धरना स्थलों का संचालन किया और निम्नलिखित संवैधानिक मांगें उठाईं:
PESA और पंचम अनुसूची का क्रियान्वयन
खनन और विस्थापन रोकना
फर्जी एनकाउंटर और सामूहिक हत्याओं को बंद करना
आदिवासी क्षेत्रों में सैन्यीकरण रोकना
जल-जंगल-जमीन और सामुदायिक अधिकारों की सुरक्षा
संगठनों का कहना है कि रघु पर माओवादी संगठनों से वित्तीय सहायता प्राप्त करने का आरोप लोकतांत्रिक विरोध को अपराधबद्ध करने की कोशिश है। अब तक सार्वजनिक रूप से कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है।
रघु मिडियामी को गिरफ्तार किए जाने से पहले मोटरसाइकिल दुर्घटना में अंगुली में चोट लगी थी। जेल प्रशासन ने कथित तौर पर उचित और समय पर इलाज नहीं दिया, जिसके कारण उनकी अंगुली स्थायी रूप से मुड़ गई। मानवाधिकार समूह इसे जेल में क्रूरता और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करार देते हैं।
अक्टूबर 2024 में छत्तीसगढ़ सरकार ने मूलवासी बचाओ मंच पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद संगठन के सदस्यों पर गिरफ्तारी और धमकियों की लहर देखी गई। रघु की गिरफ्तारी इस व्यापक पैटर्न का हिस्सा है, जिसमें आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों की मांग को आतंकवादी गतिविधियों से जोड़कर पेश किया जा रहा है।
मानवाधिकार संगठनों की मांगें
1.रघु मिडियामी की तुरंत रिहाई।
2.एनआईए और सभी यूएपीए मामलों को वापस लिया जाए।
उचित और तत्काल चिकित्सकीय उपचार सुनिश्चित किया जाए।
4.बस्तर में शांतिपूर्ण आदिवासी आंदोलनों पर दमन बंद किया जाए।
कैंपेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन (CASR) ने देश भर के लोकतांत्रिक और प्रगतिशील संगठनों से अपील की है कि वे रघु मिडियामी की रिहाई और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हों।