बिहार में 16 मार्च को होने वाले 5 राज्यसभा सीटों के चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी खेमे में नए विवाद ने जन्म लिया है, जब RJD के विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि इस बार हिना शहाब को महागठबंधन का उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए। उनके इस सुझाव से विपक्षी दलों की रणनीति पर नई बहस छिड़ गई है।
भाई वीरेंद्र ने कहा, “मेरी व्यक्तिगत राय है कि इस बार अल्पसंख्यक प्रतिनिधि को राज्यसभा भेजा जाना चाहिए और हमारे विचार में हिना शहाब इस भूमिका के लिए उपयुक्त हैं। यह सिर्फ मेरी राय है, पार्टी नेतृत्व को इस पर विचार करना चाहिए।”
वहीं, AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने हिना शहाब को समर्थन देने के सवाल पर नाराजगी जताई। उन्होंने मीडिया से कहा, “हम क्यों RJD का समर्थन करें? इस बार हमें खुद प्रतिनिधि भेजने का मौका मिलना चाहिए। हमारा समर्थन लेने की बजाय हमारी बात सुनी जाए।”
अख्तरुल ईमान के तेवरों से स्पष्ट है कि AIMIM फिलहाल समर्थन देने के मूड में नहीं है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी हिना शहाब के नाम पर सहमति देने को तैयार नहीं हैं!
राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। बिहार विधानसभा में NDA के पास 202 विधायकों का समर्थन है, जिससे उन्हें 5 में से कम से कम 4 सीटें मिलना लगभग तय है।
लेकिन पाँचवीं सीट की कुंजी AIMIM के 5 और BSP के 1 विधायक के हाथ में है। महागठबंधन के पास अकेले 35 विधायक हैं। ऐसे में AIMIM का समर्थन हासिल करना विपक्ष के लिए निर्णायक हो सकता है।
हिना शहाब दिवंगत पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की पत्नी हैं और उनके बेटे ओसामा शहाब वर्तमान में RJD विधायक हैं। उनके नाम से मुस्लिम वोट बैंक को जोड़ने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हिना शहाब का नाम विपक्षी रणनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।
एनडीए में भी चिराग पासवान, उपेन्द्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी ने राज्यसभा सीटों के लिए अपनी दावेदारी रख दी है। इस तरह दोनों खेमों में रणनीति और समीकरण पेचीदा होते जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पांचवीं सीट पर AIMIM का रुख और महागठबंधन की रणनीति निर्णायक साबित होगी। इस सीट पर सियासी लड़ाई आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।