इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सोमवार को दिए गए एक बयान ने राजधानी की राजनीति को हिला दिया है। पितामपुरा में आयोजित अखिल भारतीय ब्राह्मण सम्मेलन में उन्होंने कहा कि “अगर समाज में ज्ञान की ज्योति कोई जला रहा है, तो वह ब्राह्मण समुदाय है,” और हर सरकार को “ब्राह्मणों के कल्याण के लिए काम करना चाहिए।”
रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा “ब्राह्मण न केवल शास्त्रों की पूजा करते हैं, बल्कि अस्त्र-शस्त्र का भी सम्मान करते हैं। ज्ञान और शक्ति, दोनों से ही समाज और राष्ट्र की रक्षा संभव है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि दिल्ली में पिछले 27 वर्षों से विकास की रफ्तार धीमी रही है, और अब समय है कि “सब मिलकर दिल्ली को एक विकसित शहर के रूप में आगे बढ़ाएँ।”
गुप्ता के इस बयान के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों में नाराज़गी फैल गई।
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता संजय झा ने इसे “जनभावनाओं के प्रति असंवेदनशील” और “दलित-पिछड़े वर्गों का अपमान” बताया। उन्होंने कहा “किसी एक समुदाय को इस तरह विशेष दर्जा देना न केवल असंवेदनशीलता है, बल्कि सामाजिक समानता की भावना के खिलाफ भी है।”
बीजेपी के भीतर इस बयान को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के शब्दों को “सांस्कृतिक संदर्भ” में देखा जाना चाहिए।
वहीं, डॉ. रेहना रवींद्रन, जो एंटी-कास्ट एक्टिविस्ट हैं, ने कहा “रेखा गुप्ता वही कह रही हैं जो बीजेपी-आरएसएस का पूरा ढांचा सोचता है — यह बयान सामाजिक श्रेणियों की श्रेष्ठता को बढ़ावा देता है।”
लेखक डॉ. लक्ष्मण यादव ने इसे “मैनुवादी विचारों की वापसी का संकेत” बताया और कहा कि दलित, पिछड़े व आदिवासी समुदायों को सतर्क रहना चाहिए।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद सोशल मीडिया पर #RekhaGuptaCasteRemark और #BrahminPrivilege जैसे हैशटैग्स तेजी से ट्रेंड करने लगे।
48 घंटों के भीतर इन पर 50,000 से अधिक पोस्ट्स किए गए। कई उपयोगकर्ताओं ने इसे “वोट बैंक साधने की कोशिश” बताया, तो कुछ ने मुख्यमंत्री के समर्थन में लिखा कि “ब्राह्मण संस्कृति की रक्षा करना गौरव की बात है।”
यह पहली बार नहीं है जब रेखा गुप्ता अपने बयानों को लेकर विवादों में हैं।
मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके पुराने सोशल मीडिया पोस्ट्स वायरल हुए थे, जिनमें उन्होंने मुस्लिम समुदाय और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की थीं।
हालांकि, उस समय उन्होंने इन पोस्ट्स को “पुराने और संदर्भ से हटाए गए” बताकर सफाई दी थी!
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि रेखा गुप्ता का यह बयान सिर्फ सांस्कृतिक नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति भी है।
दिल्ली नगर निगम और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले बीजेपी संभवतः उच्च जाति मतदाताओं को मजबूत आधार के रूप में साधने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के बयान सामाजिक ध्रुवीकरण को गहरा सकते हैं और राजधानी में जातीय विमर्श को पुनर्जीवित कर सकते हैं।
रेखा गुप्ता का “ज्ञान की ज्योति” वाला बयान राजनीतिक विमर्श का नया मुद्दा बन चुका है।
जहां बीजेपी समर्थक इसे “संस्कृति और परंपरा का सम्मान” बता रहे हैं, वहीं विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता इसे “जातिवादी और विभाजनकारी राजनीति” करार दे रहे हैं।
अब सबकी नज़र मुख्यमंत्री की अगली प्रतिक्रिया पर है — क्या वह सफाई देंगी, या विवाद को चुनावी लाभ में बदलने की कोशिश करेंगी?
