हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में कश्मीरी शॉल विक्रेताओं पर लगातार उत्पीड़न, धमकियों और हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) के अनुसार इस साल हिमाचल में शाल विक्रेताओं के खिलाफ 16–17 ऐसे मामले दर्ज हुए हैं, जिसमें स्थानीय समूहों द्वारा उन्हें राज्य छोड़ने के लिए दबाव बनाया गया और कुछ पर हमला भी किया गया।
समूह ने बताया कि ये विक्रेता कई दशकों से हिमाचल प्रदेश के बाजारों में अपना व्यापार चला रहे हैं, लेकिन अब उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं, उनका सामान तोड़ा जा रहा है और मोबाइल फोन तक तोड़ दिए गए हैं। कई विक्रेताओं ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इन घटनाओं को रिकॉर्ड करने की कोशिश की तो उन्हें रोक दिया गया।
JKSA ने कहा कि स्थानीय दुकानदारों, राजनीतिक वर्चस्ववादी समूहों और कुछ व्यक्तियों द्वारा घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है, जबकि विक्रेताओं के पास सभी वैध दस्तावेज और अनुमति हैं।
एक बयान में JKSA ने प्रधानमंत्री, हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि उत्पीड़न और साम्प्रदायिक असहिष्णुता को रोका जा सके। बयान में कहा गया है कि प्रशासन द्वारा सख्त कदम उठाए जाने पर यह संदेश जाएगा कि साम्प्रदायिक विभाजन और भय का समाज में कोई स्थान नहीं है।
स्थानीय प्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं ने भी इन घटनाओं पर चिंता जताई है और विक्रेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। कुछ मामलों में विक्रेताओं को कड़ी निगरानी और रोक-टोक का सामना करना पड़ा, जिससे उनका आर्थिक नुकसान और भय और बढ़ गया है।
समाज के कुछ वर्गों ने इन घटनाओं की निंदा करते हुए कहा है कि भारत के विविध समाज में हर समुदाय को सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए, और किसी भी नागरिक को अपने देश में भय के बिना काम करने से नहीं रोका जाना चाहिए।
