राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ “हिंदुत्व की राजनीति” नहीं करता, बल्कि उसका मूल उद्देश्य व्यक्ति निर्माण के माध्यम से सशक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण करना है।
‘संघ यात्रा – नए क्षितिज, नए आयाम’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “संघ का लक्ष्य सत्ता प्राप्त करना नहीं है। हमारा उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों का निर्माण करना है जो चरित्रवान, सक्षम और राष्ट्रनिष्ठ हों। जब व्यक्ति मजबूत होगा, तभी समाज और राष्ट्र मजबूत होंगे।”
भागवत ने कहा कि कई लोग Rashtriya Swayamsevak Sangh को अर्धसैनिक या सेवा संगठन के रूप में देखते हैं, जबकि संघ एक व्यापक सामाजिक शक्ति है। उन्होंने कहा, “संघ समाज के प्रत्येक क्षेत्र में कार्य करता है। इसे सीमित दायरे में समझना उचित नहीं है।”
उन्होंने यह भी कहा कि संघ को किसी राजनीतिक दल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक Bharatiya Janata Party को संघ की वैचारिक पृष्ठभूमि से जुड़ा मानते हैं, लेकिन उन्होंने दोहराया कि संघ का कार्य राजनीति से परे है।
संघ प्रमुख ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में विश्व भारत की ओर नेतृत्व की अपेक्षा से देख रहा है। “दुनिया सत्य से अधिक शक्ति को समझती है, इसलिए शक्ति अर्जित करना आवश्यक है, किंतु उसका उपयोग संयम और नैतिकता के साथ होना चाहिए,” उन्होंने कहा।
उन्होंने स्वयंसेवकों से समाज के सभी वर्गों में समरसता और संगठन का संदेश पहुंचाने का आह्वान किया।
महिलाओं की भूमिका पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि शासन और नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी 33 प्रतिशत तक सीमित नहीं रहनी चाहिए “यदि समाज आधा पुरुष और आधा महिला है, तो निर्णय प्रक्रिया में भी 50 प्रतिशत भागीदारी स्वाभाविक है,”
आरक्षण, वर्गीकरण और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों पर उन्होंने समाज से ईमानदारी और संवाद के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि विभाजनकारी सोच से ऊपर उठकर समाज को एकजुट करना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है। “जो समाज को जोड़ने का कार्य करता है, वही सच्चे अर्थों में हिंदू है,”!
भागवत ने पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्रीय दायित्व बताते हुए विशेष रूप से उत्तराखंड की नदियों के संरक्षण का उल्लेख किया। उन्होंने स्थानीय समुदायों और शासन के समन्वित प्रयासों पर बल दिया।
संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दिया गया यह वक्तव्य राजनीतिक और सामाजिक हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संघ प्रमुख ने दोहराया कि संगठन का मिशन राजनीति से परे है और उसका लक्ष्य व्यक्ति निर्माण, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करना है।