UAPA संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय, हाई कोर्ट को भेजे मामले

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के 2019 संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुनने से इनकार कर दिया और इन मामलों को संबंधित हाई कोर्ट में भेजने का आदेश दिया।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार एवं जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने स्पष्ट किया कि UAPA संशोधन अधिनियम, 2019 को चुनौती देने वाली याचिकाओं को पहले हाई कोर्ट में सुना जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इन मामलों में पहली सुनवाई का मंच नहीं हो सकता।

*हाई कोर्ट में होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “कई बार समस्याएं होती हैं—कभी याचिकाकर्ता की ओर से, तो कभी सरकार की ओर से। इसके बाद हमें बड़े पीठ को मामले भेजने की जरूरत पड़ती है। पहले हाई कोर्ट इसे तय करें।” शीर्ष अदालत ने सभी हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वे UAPA के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करें।

*पांच वर्षों से लंबित हैं मामले
UAPA के खिलाफ याचिकाओं का एक समूह 2019 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसमें साजल अवस्थी और एनजीओ एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) द्वारा दायर याचिकाएं शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि 2019 का UAPA संशोधन अधिनियम, 1967 के अध्याय VI और धाराओं 35 एवं 36 में बड़े बदलाव करता है।

*”व्यक्ति को आतंकी घोषित करने का अधिकार अनुचित”
याचिका में कहा गया, “UAPA की नई धारा 35 केंद्र सरकार को किसी भी व्यक्ति को ‘आतंकवादी’ घोषित करने और उसके नाम को अधिनियम की चौथी अनुसूची में जोड़ने का अधिकार देती है। यह अधिकार असंवैधानिक और संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ है।”

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि “किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करना अनुचित, अन्यायपूर्ण और असंतुलित है। यदि किसी व्यक्ति को बाद में इस सूची से हटाया भी जाए, तो उसकी प्रतिष्ठा जीवनभर के लिए प्रभावित होती है।”

*हाई कोर्ट में ट्रांसफर की मांग
याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि याचिकाओं को खारिज करने की बजाय हाई कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि कई याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त नौकरशाह हैं और उनके लिए विभिन्न हाई कोर्ट में पेश होना मुश्किल होगा।

हालांकि, CJI ने दोहराया कि मामले की सुनवाई पहले हाई कोर्ट में होनी चाहिए।

गौरतलब है कि 2019 में UAPA संशोधन विधेयक संसद द्वारा 2 अगस्त को पारित किया गया था और 9 अगस्त को इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी।

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