कटनी में 167 मासूम बच्चों की 13 दिन की हिरासत को SDPI ने बताया ‘मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन’, बिहार सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल; साथ ही राज्य पर बढ़ते कर्ज को लेकर कहा ‘हर दिन ₹100 करोड़ ब्याज, विकास नहीं विनाश की ओर बढ़ रहा बिहार’

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) ने एक साथ दो गंभीर मुद्दों को लेकर बिहार सरकार और अन्य संबंधित प्रशासनिक तंत्र पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के बिहार प्रदेश महासचिव डॉ. रिज़वान मजहरी ने मध्य प्रदेश के कटनी में 167 बच्चों को कथित तौर पर हिरासत में रखने के मामले को “मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन” करार दिया है, वहीं राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी गहरी चिंता जताते हुए बढ़ते कर्ज को “आर्थिक संकट की आहट” बताया है।

कटनी मामला: “मासूम बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार”

SDPI के अनुसार, बिहार से महाराष्ट्र मदरसा शिक्षा के लिए जा रहे 167 बच्चों को कटनी (मध्य प्रदेश) में पिछले 13 दिनों से रोके रखा गया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. मजहरी ने कहा कि बिना ठोस आधार के बच्चों को इतने लंबे समय तक हिरासत में रखना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि उनके मानसिक और शैक्षणिक भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ भी है।

उन्होंने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जांच आवश्यक थी, तो इतने दिनों तक बच्चों को “कैदियों की तरह” रखने का औचित्य समझ से परे है। साथ ही, उन्होंने बिहार सरकार की “चुप्पी” पर भी सवाल खड़े किए और मांग की कि मुख्यमंत्री स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप किया जाए।

पार्टी ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार से बच्चों की तत्काल रिहाई, सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। SDPI ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वह बड़े स्तर पर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन करेगी और मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग व बाल अधिकार संस्थाओं तक ले जाया जाएगा।

बिहार का कर्ज: “हर दिन ₹100 करोड़ ब्याज, विकास पर सवाल”

इसी के साथ SDPI ने बिहार की आर्थिक स्थिति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉ. मजहरी ने दावा किया कि राज्य सरकार प्रतिदिन लगभग ₹100 करोड़ केवल कर्ज के ब्याज के रूप में चुका रही है, जिससे विकास कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार का विकास मॉडल “उधार आधारित और खोखला” है, जहां बुनियादी ढांचे के नाम पर कर्ज लिया जा रहा है, लेकिन रोजगार सृजन और स्थायी आर्थिक सुधार की दिशा में ठोस कदम नजर नहीं आते। उनके अनुसार, राज्य में पलायन की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।

SDPI ने सरकार पर भ्रष्टाचार और फिजूलखर्ची के आरोप भी लगाए और मांग की कि बिहार की आर्थिक स्थिति पर एक विस्तृत श्वेत पत्र जारी किया जाए, ताकि जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।

राजनीतिक संदेश और आगे की रणनीति

दोनों मुद्दों को उठाते हुए SDPI ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह आने वाले समय में इन विषयों पर जन-जागरूकता अभियान चलाएगी। पार्टी का कहना है कि बच्चों के अधिकारों और राज्य की आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दों पर “सरकार की जवाबदेही तय करना जरूरी है”।

फिलहाल, इन आरोपों पर बिहार सरकार या संबंधित प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

खुदाबख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी को मिली नई नेतृत्वकारी दिशा, उर्दू साहित्य के प्रतिष्ठित शोधकर्ता प्रोफेसर ज़ाहिदुल हक़ निदेशक नियुक्त

प्रख्यात उर्दू विद्वान, शायर और आलोचक प्रोफेसर ज़ाहिदुल हक़ ने आज ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी एलुमनाई फ्रेटरनिटी (एमएएफ) ने बिहार के नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय को शामिल नहीं किए जाने पर जताई गहरी चिंता

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी एलुमनाई फ्रेटरनिटी (एमएएफ) ने बिहार सरकार द्वारा “सेवन रिजॉल्व्स-3 (2025-30)”

शोध को वास्तविक समाधानों में बदलना:ज़हूर हुसैन बट

आईआईटी कानपुर-एनवाईयू टंडन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग की साझेदारी यह दिखाती है कि उभरती प्रौद्योगिकियों में

मज़फ्फरपुर में उर्दू भाषा प्रकोष्ठ का प्रतियोगिता कार्यक्रम: विद्यार्थियों ने प्रस्तुत की उत्कृष्ट प्रतिभा, ‘उर्दू नामा’ पत्रिका का हुआ लोकार्पण

उर्दू निदेशालय, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार सरकार की योजना के अंतर्गत उर्दू भाषा सेल, मज़फ्फरपुर