सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एम के फैज़ी ने संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा मिनुटमैन III अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण करने की कड़ी निंदा की है। फैज़ी ने इसे सिर्फ “सामान्य अभ्यास” बताने की अमेरिकी दलील को खारिज करते हुए कहा कि यह परीक्षण उस हथियार की शक्ति का प्रदर्शन है, जो हिरोशिमा के परमाणु बम से कहीं अधिक विनाशकारी है।
फैज़ी ने चेताया कि पश्चिम एशिया पहले से ही संघर्ष की आग में जल रहा है और ऐसे समय में यह परीक्षण अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बेहद चिंताजनक संदेश देता है। “संयम और कूटनीति को बढ़ावा देने के बजाय, यह मिसाइल परीक्षण वैश्विक राजनीति में परमाणु भय को सामान्य बनाने की खतरनाक प्रवृत्ति को दर्शाता है,” उन्होंने कहा। फैज़ी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा को लेकर गंभीर चिंता भी व्यक्त की।
उन्होंने अमेरिकी हस्तक्षेपों का इतिहास याद दिलाते हुए कहा कि अफगानिस्तान, इराक, लीबिया, सीरिया और वियतनाम में सैन्य वर्चस्व की तलाश ने बार-बार देशों की संप्रभुता और आम नागरिकों की सुरक्षा को कमजोर किया है। फैज़ी ने 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर किए गए परमाणु हमलों का हवाला देते हुए कहा कि दो लाख से अधिक लोग मारे गए और पीढ़ियों तक लोग विकिरण एवं स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते रहे।
फैज़ी ने कहा कि आज का मिसाइल परीक्षण उस विनाशकारी इतिहास की याद दिलाता है और वर्तमान युद्ध तथा मानवीय संकट की गंभीरता को बढ़ाता है। उन्होंने गाजा में हिंसा और ईरान से जुड़ी बढ़ती शत्रुताओं का भी हवाला दिया और कहा कि ये क्षेत्रीय अस्थिरता और मानवीय पीड़ा का खतरा और बढ़ा रही हैं।
फैज़ी ने भारत सरकार से अपील की कि वह शांति और गुटनिरपेक्षता के अपने ऐतिहासिक सिद्धांतों के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट आवाज उठाए, युद्धविराम और संवाद की वकालत करे, और वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर किसी भी बड़े संघर्ष को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाए।