गोपालगंज में ‘तहरीक-ए-तहफ़्फ़ुज़-ए-उर्दू ज़बान व अदब’ का जलसा आयोजित!उर्दू शिक्षकों की संख्या बढ़ाने और भाषा के संरक्षण पर ज़ोर

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

बिहार में उर्दू भाषा की शिक्षा और प्रचार-प्रसार को लेकर ‘तहरीक-ए-तहफ़्फ़ुज़-ए-उर्दू ज़बान व अदब’ के तहत गोपालगंज के ग़ालिब अकादमी में एक भव्य जलसा आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों और उर्दू से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रमुख व्यक्तियों ने शिरकत की और उर्दू भाषा को संरक्षित करने के लिए संगठित होने का संदेश दिया।

*उर्दू शिक्षकों की संख्या बढ़ाने पर ज़ोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय उर्दू शिक्षक संगठन बिहार के संरक्षक एवं बिहार स्टेट मदरसा एजुकेशन बोर्ड पटना के सचिव तथा सेकेंडरी एजुकेशन बिहार के डिप्टी डायरेक्टर जनाब अब्दुस्सलाम अंसारी ने कहा कि “गोपालगंज में 1100 नहीं बल्कि 3000 उर्दू शिक्षकों की ज़रूरत है”। उन्होंने उर्दू शिक्षकों की कम संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि “इसका मुख्य कारण हमारी निष्क्रियता और असंगठित होना है”। उन्होंने बताया कि “वर्तमान में करीब 1000 अरबी-फारसी शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन 700 पद अब भी खाली हैं। इसलिए उर्दू भाषा को जीवित रखने के लिए लोगों को जागरूक और संगठित होने की ज़रूरत है।”

*बचपन से उर्दू शिक्षा देने की अपील
बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (BPSC) के पूर्व चेयरमैन जनाब इम्तियाज़ अहमद करीमी ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाना ज़रूरी है, लेकिन उनके लिए उर्दू शिक्षा की बुनियाद भी मज़बूत होनी चाहिए। उन्होंने उर्दू की गिरती स्थिति पर चिंता जताई और समाज से इसे बचाने की अपील की।

*’तहरीक-ए-तहफ़्फ़ुज़-ए-उर्दू’ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तहरीक-ए-तहफ़्फ़ुज़-ए-उर्दू ज़बान व अदब के संस्थापक मोहम्मद रफी ने इस आंदोलन के सफ़र को बयान करते हुए कहा कि “इसकी शुरुआत भले ही 10 जनवरी 2025 को पटना से हुई हो, लेकिन इसकी बुनियाद 11 नवंबर 2018 को मुज़फ़्फ़रपुर के राम दयालु सिंह कॉलेज में रखी गई थी”। उन्होंने बताया कि “उस समय पुलिस और प्रशासन ने कई अड़चनें खड़ी कीं और हमारे पोस्टर तक फाड़ दिए गए,लेकिन हम उर्दू के हक़ के लिए संघर्ष से पीछे नहीं हटे”। उन्होंने कहा कि “यह तहरीक अब पूरे बिहार में फैल रही है और गोपालगंज में इसे और मज़बूती देने की ज़रूरत है”।

*’उर्दू हमारी पहचान है’ – शिक्षाविदों का संदेश
राष्ट्रीय उर्दू शिक्षक संगठन बिहार के अध्यक्ष ताजुल आरिफ़ीन ने कहा कि उर्दू हमारी तहज़ीब और पहचान है। इसे बचाने के लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उर्दू शिक्षा के लिए आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

राष्ट्रीय उर्दू शिक्षक संगठन बिहार के राज्य सचिव मोहम्मद ताजुद्दीन ने कहा कि जनाब अब्दुस्सलाम अंसारी और मोहम्मद रफी उर्दू भाषा के सच्चे ग़ाज़ी (योद्धा) हैं, जो इसकी हिफाज़त के लिए हर स्तर पर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि “हर घर और दुकान पर उर्दू में नामपट्ट (साइनबोर्ड) ज़रूर लगाया जाए ताकि उर्दू का अस्तित्व बचाया जा सके”।

*शिक्षकों और बुद्धिजीवियों की भागीदारी
इस सम्मेलन में गोपालगंज के प्रतिष्ठित शिक्षाविद और बुद्धिजीवी बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से मिन्हाज ढाकोवी, मंज़ूर आलम, तनवीर आलम, मोहम्मद अली ज़फर,ज़ुल्फ़िकार अली (पूर्व प्रधानाचार्य, उर्दू कॉलेज गोपालगंज),नियाज़ अहमद (प्रधानाचार्य, एम.एम. मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, तरकहाँ, गोपालगंज),जमशेद आलम (अध्यक्ष, सेकेंडरी स्कूल टीचर्स एसोसिएशन, गोपालगंज),प्रो. कौसर अली (अर्थशास्त्र विभाग, कमला राय कॉलेज, गोपालगंज),तुलसी दत्त पांडे, प्रो. रज़ी अहमद फैज़ी (प्रोफेसर, नेशनल कॉलेज, बरौली),तनवीर अख़्तर (सचिव, मदरसा इस्लामिया, गोपालगंज) के नाम शामिल हैं

*सम्मेलन का सफल संचालन और समापन
कार्यक्रम की अध्यक्षता साहब हुसैन (प्रधान अध्यापक, मध्य विद्यालय, पटेहरा, गोपालगंज) ने की। जलसे का संचालन मीराजुद्दीन तशनह (सेवानिवृत्त शिक्षक, वी.एम. इंटर कॉलेज, गोपालगंज) ने किया।

शुरुआत हाफ़िज़ सगीर की क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत और फ़ख़र आलम चंपारणी की नात से हुई। अंत में राष्ट्रीय उर्दू शिक्षक संगठन गोपालगंज के महासचिव रफी अहमद ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

इस आयोजन ने गोपालगंज में उर्दू के प्रचार-प्रसार की एक नई ऊर्जा भर दी और प्रतिभागियों ने इसे ज़िलेभर में मज़बूती से फैलाने का संकल्प लिया।

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