इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
चेन्गलपट्टू जिले के सथानूर गांव में एक दलित महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में जलकर मौत का मामला सामने आया है। 35 वर्षीय टी. यमुना की बुधवार को चेंगलपट्टू गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्हें 85% जली हुई हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि यमुना को उनके ससुराल पक्ष ने गहनों की चोरी के झूठे आरोप में मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और साजिश के तहत जिंदा जला दिया गया।
यमुना की शादी जून 2024 में एस. थेनारासु (42) से हुई थी, जो चेंगम कस्बे में फार्मेसी चलाते हैं। विवाह के बाद दंपती, थेनारासु की बहन के. विजया के घर में रह रहे थे।
करीब एक महीने पहले विजया ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी अलमारी से 39 सावरन सोने के गहने गायब हो गए हैं। संदेह यमुना पर जताया गया, लेकिन गहनों का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद यमुना को लगातार परिवार में अपमानित और प्रताड़ित किया गया।
बुधवार को यमुना बुरी तरह जली हुई हालत में अस्पताल पहुंचाई गईं, जहां उन्होंने शाम को दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, जलने से शरीर का 85% हिस्सा प्रभावित था।
घटना के बाद यमुना के मायके वालों ने ससुराल पक्ष के तीन लोगों — पति थेनारासु, बहन विजया और एक अन्य परिजन बी. कुमाराई — के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि यमुना को झूठे आरोपों में फंसाकर मानसिक उत्पीड़न किया गया और अंततः उन्हें जिंदा जला दिया गया।
पुलिस ने मर्ग (अचानक मौत) रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है और अधिकारियों ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दलित संगठनों और महिला अधिकार समूहों ने इसे जातिगत भेदभाव, घरेलू हिंसा और संस्थागत निष्क्रियता का गंभीर उदाहरण बताया है।
तमिलनाडु दलित महिला मंच की संयोजक ने कहा “यह एक सामाजिक हत्या है। संदेह के आधार पर किसी महिला को मानसिक रूप से तोड़कर मौत के मुंह में ढकेलना, यह कानून और संवैधानिक व्यवस्था पर हमला है।”
यमुना के परिजनों ने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने और सभी आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है! फिलहाल, मामले की जांच जारी है और पुलिस ने अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की है।
