अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों ने मध्य पूर्व में गंभीर संकट पैदा कर दिया है। व्हाइट हाउस के शीर्ष आर्थिक सलाहकार केविन हासेट के अनुसार, अब तक अमेरिका ने ईरान पर युद्ध में लगभग $12 अरब खर्च किए हैं। शुरुआती सप्ताह में केवल गोला-बारूद पर $5 अरब से अधिक का खर्च हुआ। हासेट ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर इसका कोई गंभीर असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका अब खुद बड़ा तेल उत्पादक बन चुका है।
ईरान में तबाही
तेहरान में मिसाइल और ड्रोन हमलों से कई आवास और नागरिक संरचनाएँ ध्वस्त हो गई हैं। तस्वीरों में एक महिला अपने घर के मलबे में सामान छानती दिख रही है। अब तक कम से कम 1,444 ईरानी नागरिक शहीद और 13 अमेरिकी सैनिक हताहत हो चुके हैं।
हॉरमज़ जलसंधि में बंदी
ईरान ने हॉरमज़ जलसंधि को लगभग बंद कर दिया है। लगभग 1,000 जहाज इंतजार में खड़े हैं, जिनमें 20 तेल टैंकर शामिल हैं। यह जलसंधि विश्व के कुल समुद्री तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत संभालती है।
तेल कीमतों में उछाल
हॉरमज़ में अड़चन और युद्ध के जोखिम के कारण तेल की कीमतें $102–$103 प्रति बैरल तक बढ़ गई हैं। यह स्तर 2022 के बाद का उच्चतम है।
तेल और गैस उत्पादन पर प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों ने उत्पादन बंद कर दिया है। क्वेटर एनर्जी, कुवैत पेट्रोलियम और Bapco ने फोर्स मैजोर घोषित किया। वहीं सऊदी अरामको और UAE की ADNOC ने रिफाइनरियां बंद कर दी हैं।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने 400 मिलियन बैरल तेल अपने आपातकालीन भंडार से जारी किया, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल अस्थायी राहत देगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
भारत जैसे देश अब सीधे ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं ताकि अपने तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। अमेरिकी अधिकारी बताते हैं कि युद्ध का उद्देश्य अब ईरान की मिसाइल क्षमता और तेल परिवहन बुनियादी ढांचे को प्रभावित करना है।
अमेरिका द्वारा $12 अरब खर्च करके ईरान पर किए गए हमलों ने मध्य पूर्व और वैश्विक तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है। हॉरमज़ जलसंधि बंद, तेल $100 पार, और हजारों जहाज इंतजार में हैं। युद्ध के बढ़ते दुष्प्रभाव पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर गंभीर असर डाल रहे हैं।