हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना को डुबो दिए जाने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ भारत की समुद्री नीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सीताराम खोइवाल ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह मोदी सरकार की हिंदुस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता की रक्षा में गंभीर विफलता को उजागर करता है।
घटना 18 से 25 फरवरी के बीच विशाखापत्तनम में आयोजित मिलन 2026 अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू और नौसैनिक अभ्यास में अतिथि के रूप में भाग लेने के बाद ईरानी जहाज के देश लौटते समय हुई। श्रीलंका के निकट अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से गुजरते समय इस विश्वासघाती हमले में कम से कम 87 नाविकों की मौत हुई और दर्जनों अब भी लापता हैं। सुबह प्राप्त आपात संदेश और 4 मार्च को अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ द्वारा हमले की पुष्टि से स्पष्ट होता है कि यह एक पूर्व नियोजित कार्रवाई थी, जिसने अंतरराष्ट्रीय नियमों की खुलेआम अवहेलना की।
खोइवाल ने कहा, “मोदी सरकार ने वाशिंगटन के साथ क्वाड और रणनीतिक संबंधों को बढ़ावा देते हुए भी ईरानी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की। हमारे समुद्री क्षेत्र के इतने निकट ऐसी घटना यह दर्शाती है कि भारत के समुद्री हित विदेशी शक्तियों के प्रभाव में आ गए हैं।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस हमले की पूर्व सूचना खुफिया एजेंसियों के पास थी, और यदि थी तो उसे क्यों साझा नहीं किया गया।
SDPI ने चेतावनी दी कि यह हमला भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा है। ईरान लंबे समय से भारत का महत्वपूर्ण तेल और ऊर्जा साझेदार रहा है और इस तरह की सैन्य कार्रवाई पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकती है।
खोइवाल ने मांग की कि पूरे प्रकरण की तत्काल संसदीय जांच कराई जाए। उन्होंने कहा, “भारत को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय शांति की रक्षा के लिए स्वतंत्र और स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए। नाविकों का खून उस व्यवस्था की जिम्मेदारी याद दिलाता है जिसने राष्ट्रीय हितों से अधिक विदेशी नीतियों को महत्व दिया।”