इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
लद्दाख में बुधवार को राज्यत्व और छठी अनुसूची के तहत विशेष प्रावधानों की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन हिंसक रूप ले लिया। इसमें चार लोगों की मौत हो गई और 80 से अधिक लोग घायल हुए। घायलों में कई पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
प्रदर्शन की शुरुआत उस समय उग्र हुई जब दो प्रमुख भूख हड़तालियों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रदर्शनकारी स्थानीय भाजपा कार्यालय में तोड़फोड़ और आगजनी करने लगे, साथ ही पुलिस वाहनों को भी क्षतिग्रस्त किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। कुछ क्षेत्रों में गोलीबारी की भी खबरें हैं।
लेह अपेक्स बॉडी के अध्यक्ष चेरींग डॉर्जे ने कहा, “शहर में जबरदस्त फायरिंग हुई, चार लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हुए। हम स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं।”
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो 15 दिन से भूख हड़ताल पर थे, ने मंगलवार को अपनी हड़ताल समाप्त की, लेकिन कुछ युवाओं द्वारा पथराव करने के बाद तनाव बढ़ गया। उन्होंने सभी से शांति बनाए रखने की अपील की।
प्रशासन ने लेह और कारगिल में कर्फ्यू लागू कर दिया है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। प्रदर्शनकारियों के हक में शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए केंद्र और स्थानीय नेताओं के बीच 6 अक्टूबर को नई वार्ता प्रस्तावित है, लेकिन हालिया हिंसा से वार्ता की सफलता पर सवाल उठने लगे हैं।
लद्दाख को 2019 में जम्मू और कश्मीर से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि राज्यत्व और छठी अनुसूची के तहत विशेष प्रावधान उनकी भूमि, संस्कृति और रोजगार की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं।
