15 मई के बाद वक्फ संशोधन एक्ट के खिलाफ आंदोलन में फिर आएगी तेज़ी!बिहार,उड़ीसा,झारखंड और पश्चिम बंगाल में विरोध के नए चरण की घोषणा — हर गुरुवार रोज़ा,शुक्रवार को काली पट्टी, और शनिवार को मोबाइल लाइट से विरोध प्रदर्शन की अपील- अमीर-ए-शरीअत का दो टूक ऐलान: “आंदोलन जारी रहेगा”

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

वक्फ संशोधन एक्ट 2025 के खिलाफ जारी जन जागरूकता आंदोलन को और अधिक प्रभावशाली बनाने और अगले चरण की रणनीति तय करने के लिए अमीर-ए-शरीअत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी की हिदायत पर 10 मई 2025 को ईमारत-ए-शरीआ फुलवारी शरीफ के मीटिंग हॉल में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

वक्फ एक्ट सिर्फ एक कानूनी नहीं, बल्कि आस्था और संविधान से जुड़ा मुद्दा है

बैठक की शुरुआत करते हुए ईमारत-ए-शरीआ के कार्यवाहक नाज़िम मुफ्ती मोहम्मद सईदुर्रहमान कासमी ने कहा कि वक्फ संशोधन एक्ट 2025 केवल एक कानूनी संशोधन नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता, पर्सनल लॉ, संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक पहचान पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि यह क़ानून मुसलमानों के संवैधानिक अधिकारों के साथ एक भयानक मज़ाक है, और यही कारण है कि देशभर की सभी मिल्ली तंजीमें और इंसाफ पसंद हलके इसके खिलाफ गंभीर और चिंतित हैं।

उन्होंने बताया कि कानून के प्रारंभिक चरण से लेकर इसके संसद में पारित होने तक ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अगुवाई में और अमीर-ए-शरीअत की सरपरस्ती में बिहार, झारखंड, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में व्यापक स्तर पर जो संघर्ष हुआ, वह ऐतिहासिक था। सैकड़ों विरोध सभाएं, जुलूस, धरने, मेमोरेंडम, लीगल काउंसलिंग, मतदान अभियान और उलेमा, इमाम, बुद्धिजीवी, सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से नुक़सानात से अवगत कराने का सिलसिला चला।

सरकार चुप, मामला कोर्ट में — लेकिन आंदोलन जारी रहेगा

मुफ्ती मोहम्मद सईदुर्रहमान कासमी ने कहा कि भले ही सरकार ने अब तक कानून वापस लेने का कोई संकेत नहीं दिया है और मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, लेकिन हमारा संवैधानिक, शरीई और ईमानी फ़र्ज़ है कि हम अपने आंदोलन को तब तक जारी रखें जब तक हमारी मांग पूरी न हो जाए।

इसी पृष्ठभूमि में हज़रत अमीर-ए-शरीअत की हिदायत पर यह विशेष बैठक बुलाई गई ताकि पिछले आंदोलन की समीक्षा करके आगामी रणनीति तय की जा सके।

15 मई के बाद विरोध आंदोलन का दूसरा चरण शुरू होगा

जमीयत उलेमा बिहार के नाज़िम डॉ. फैज़ अहमद क़ादरी ने कहा, “यह मामला जितना गंभीर है, संघर्ष भी उतना ही व्यापक और प्रभावशाली होना चाहिए। अमीर-ए-शरीअत की क़ियादत में अब तक जो आंदोलन चला है, वह काबिल-ए-फख्र है और इंशाअल्लाह आगे और ताक़त के साथ जारी रहेगा।”

इदारा-ए-शरीआ बिहार के डॉ. फरीद, मोमिन कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मौलाना अबुल कलाम शम्सी, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के प्रतिनिधि जनाब क़मर वारसी सहित कई जिम्मेदारों ने इस आंदोलन में पूरी तरह साथ देने का ऐलान किया।

अमीर-ए-शरीअत का साफ एलान: “न थकना है, न डरना है”

मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी साहब ने अपनी अध्यक्षीय तक़रीर में कहा “हमें न थकना है, न मायूस होना है, और न ही किसी डर का शिकार होना है। चूंकि यह आंदोलन दीन, संविधान और ईमान से जुड़ा है, इसलिए यह जारी रहेगा और इंशाअल्लाह मंज़िल तक पहुंच कर रहेगा।”
उन्होंने सभी संगठनों और जिम्मेदारों की एकजुटता की सराहना की और कहा कि इस आंदोलन से जो जागरूकता पैदा हुई है, वह क़ौम के लिए भविष्य में भी फ़ायदेमंद साबित होगी।

बैठक में सर्वसम्मति से पारित महत्वपूर्ण प्रस्ताव

1.पहलगाम में हुई आतंकी घटना की तीव्र निंदा करते हुए उसे मानवता और धर्म दोनों के खिलाफ घोषित किया गया।
2.5 मई तक जारी विरोध आंदोलन की समीक्षा के बाद यह तय किया गया कि 15 मई के बाद आंदोलन का दूसरा चरण ज़ोर-शोर से शुरू किया जाएगा।

3.जनजागरण के लिए निम्नलिखित कार्यक्रम तय किए गए

हर गुरुवार को रोज़ा रखा जाएगा।
हर शुक्रवार को काली पट्टी बांधकर नमाज़-ए-जुमा पढ़ी जाएगी।
हर शनिवार को शाम में खुले स्थानों पर मोबाइल की लाइट जलाकर शांतिपूर्ण विरोध किया जाएगा।
इन सभी गतिविधियों की तस्वीरें सोशल मीडिया और मीडिया पर ज़रूर साझा की जाएं, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर असर हो।

4.राज्य स्तर पर एक विशाल सभा के आयोजन की योजना पर भी सहमति बनी और सभी प्रतिनिधियों ने अमीर-ए-शरीअत से मार्गदर्शन की गुज़ारिश की, जिस पर सभी संगठन उनके साथ खड़े होंगे।

बैठक में शामिल प्रमुख हस्तियां

इस महत्वपूर्ण बैठक में क़ाज़ी-ए-शरीअत मौलाना अनज़ार आलम क़ासमी, नायब नाज़िम मुफ़्ती मोहम्मद सनाउल हुदा क़ासमी, नायब नाज़िम मुफ़्ती मोहम्मद सुहराब नदवी, क़ायम मुक़ाम मुफ़्ती मौलाना इहतिशामुल हक़ क़ासमी, नायब क़ाज़ी मुफ़्ती वसी अहमद क़ासमी, मौलाना रिज़वान अहमद नदवी (नायब मुदीर नकीब), नायब क़ाज़ी मौलाना सुहैल अख्तर क़ासमी, मुआविन नाज़िम मौलाना अहमद हुसैन क़ासमी, नायब क़ाज़ी मौलाना मुजीबुर्रहमान क़ासमी, मुआविन क़ाज़ी मौलाना मुजीबुर्रहमान भागलपुरी, और मौलाना अरशद रहमानी भी मौजूद रहे।

अंत में बैठक का समापन अमीर-ए-शरीअत की दिल को छू लेने वाली दुआ के साथ हुआ।

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