युवा शक्ति को नफरत नहीं, संविधान दे दिशा: यंग डेमोक्रेट्स का आह्वान! के.ए मोहम्मद शमीर ने युवाओं से सामाजिक व आर्थिक लोकतंत्र के लिए संगठित होने की अपील की

देश की युवा आबादी को लेकर बढ़ती वैचारिक बहस के बीच यंग डेमोक्रेट्स ने भारत के युवाओं को संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता की दिशा में संगठित करने का आह्वान किया है। संगठन के राष्ट्रीय संयुक्त संयोजक के. ए. मोहम्मद शमीर ने कहा कि भारत आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है और यह तय करेगा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत बनेगी या एक चूका हुआ अवसर।

शमीर ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत की 65 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, जिसके कारण देश को “युवा राष्ट्र” कहा जाता है। उन्होंने कहा कि आज युवाओं को जो दिशा दी जाएगी, वही आने वाले समय में भारत के सामाजिक, आर्थिक और लोकतांत्रिक भविष्य को निर्धारित करेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में दक्षिणपंथी ताकतों द्वारा युवाओं को भय, सांस्कृतिक श्रेष्ठता और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के जरिए प्रभावित करने की कोशिशें बढ़ी हैं। उनके अनुसार, युवाओं की ऊर्जा को रोजगार, नवाचार, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक सौहार्द की दिशा में लगाने के बजाय उन्हें वैचारिक संघर्षों में उलझाया जा रहा है, जो एक विविधतापूर्ण देश के लिए चिंताजनक है।

यंग डेमोक्रेट्स ने अपने वक्तव्य में भारत की “विविधता में एकता” की परंपरा को देश की मूल शक्ति बताया। संगठन का कहना है कि युवाओं को भाषाई, धार्मिक और सांस्कृतिक विविधताओं के सम्मान की भावना से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि बहुसंख्यक आक्रामकता के स्थान पर संवैधानिक नैतिकता को सर्वोपरि रखा जा सके।

संगठन ने युवाओं के सामने मौजूद संरचनात्मक चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। बयान में कहा गया कि बेरोजगारी और अल्परोज़गारी आज सबसे गंभीर समस्याओं में शामिल हैं। बड़ी संख्या में शिक्षित युवा स्थायी और सम्मानजनक रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि कई को अस्थिर और कम वेतन वाली नौकरियों से संतोष करना पड़ रहा है।

शिक्षा की गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करते हुए शमीर ने कहा कि डिग्री प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और व्यावहारिक कौशल का समावेश होना चाहिए, ताकि युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।

बढ़ती महंगाई, स्थिर वेतन और आर्थिक असमानता को भी संगठन ने युवाओं की निराशा का प्रमुख कारण बताया। बयान में कहा गया कि जब संपत्ति कुछ हाथों में सिमट जाती है और बहुसंख्यक आबादी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करती है, तो सामाजिक असंतुलन बढ़ता है और वंचित तबके के युवा सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

यंग डेमोक्रेट्स ने अपने विचारों की आधारशिला के रूप में डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के दृष्टिकोण का उल्लेख किया। संगठन ने कहा कि आंबेडकर ने राजनीतिक लोकतंत्र के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया था। केवल चुनावी प्रक्रिया पर्याप्त नहीं है; समानता, बंधुत्व और आर्थिक अवसरों की समान पहुँच के बिना लोकतंत्र अधूरा रहेगा।

संगठन ने युवाओं से आह्वान किया कि वे लोकतंत्र को केवल मतदान तक सीमित न समझें, बल्कि विविधता के सम्मान, अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने को भी अपनी जिम्मेदारी मानें।

यंग डेमोक्रेट्स ने कैंपस, कार्यस्थलों, गाँवों और डिजिटल मंचों पर युवाओं से संवाद बढ़ाने की योजना का भी संकेत दिया। संगठन का कहना है कि युवाओं को नीतियों पर सवाल उठाने, पारदर्शिता की मांग करने और संस्थाओं को जवाबदेह बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

अंत में शमीर ने कहा कि भारत का भविष्य नफरत और विभाजन पर नहीं, बल्कि सौहार्द, समावेशन और न्याय पर आधारित होना चाहिए। “समय आ गया है कि हम नफरत से उम्मीद की ओर, विभाजन से एकता की ओर और असमानता से न्याय की ओर बढ़ें,” उन्होंने कहा।

यंग डेमोक्रेट्स का मानना है कि यदि युवाओं को सही दिशा और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित मार्गदर्शन मिले, तो वे भारत को सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण, आर्थिक रूप से सशक्त और लोकतांत्रिक रूप से जीवंत राष्ट्र में परिवर्तित कर सकते हैं।

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